रांची एमएसीटी कोर्ट का आदेश: 2018 सड़क हादसे में मारे गए छात्रों के परिजनों को मिलेगा 7.73 लाख मुआवजा

रांची एमएसीटी अदालत ने 2018 में सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले दो छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का आदेश दिया।

रांची के मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने बुधवार, 27 मई 2026 को वाहन मालिक धीरेंद्र प्रसाद सिंह को 2018 के सड़क हादसे में जान गंवाने वाले दो छात्रों के परिजनों को 7.73-7.73 लाख रुपये मुआवजा और 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया। पीठासीन पदाधिकारी मनोज कुमार त्रिपाठी ने तीन महीने के भीतर भुगतान का निर्देश दिया है।

रांची एमएसीटी कोर्ट का कांके सड़क हादसे पर बड़ा फैसला

रांची: राजधानी रांची के मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने साल 2018 में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो छात्रों की मौत के मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। न्यायाधिकरण के पीठासीन पदाधिकारी मनोज कुमार त्रिपाठी की अदालत ने दुर्घटना में मारे गए दोनों युवकों के पीड़ित परिवारों को मुआवजा राशि भुगतान करने का आदेश जारी किया है।

यह कानूनी मामला 18 जून 2018 का है, जो कांके थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। दुर्घटना के शिकार हुए दोनों छात्र, जिनकी पहचान अंकित भगत और राज टोप्पो के रूप में हुई थी, एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान एक टाटा नैनो कार (निबंधन संख्या JH-01BB-0182) की टक्कर से दोनों की असमय मौत हो गई थी।

बिना बीमा वाले वाहन के मालिक पर तय हुई लापरवाही की जिम्मेदारी

न्यायिक कार्यवाही के दौरान अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर यह पूरी तरह स्पष्ट पाया कि यह जानलेवा दुर्घटना कार चालक की घोर लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने के कारण हुई थी।

वित्तीय मुआवजा और ब्याज का निर्धारण

  • मुख्य मुआवजा राशि: अदालत ने दोनों मृत छात्रों के परिजनों को अलग-अलग 7.73 लाख रुपये (प्रति परिवार) का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
  • वार्षिक ब्याज दर: इस मूल मुआवजा राशि के साथ-साथ अदालत ने पीड़ित परिवारों को 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर का भुगतान करने का भी आदेश दिया है।

बिना इंश्योरेंस वाले वाहन पर कार्रवाई

जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि दुर्घटना के समय संबंधित कार का कोई वैध बीमा (इंश्योरेंस) नहीं था। वाहन का बीमा न होने के कारण, न्यायाधिकरण ने कार के पंजीकृत मालिक धीरेंद्र प्रसाद सिंह को इस पूरे वित्तीय मुआवजे के भुगतान के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस पूरी निर्धारित राशि का भुगतान आगामी तीन महीने के भीतर सुनिश्चित किया जाए।

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