रांची के मोराबादी स्थित दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र में प्राकृतिक खेती और श्री अन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वामी भावेशानंद ने टिकाऊ कृषि अपनाने और भारत को विश्व गुरु बनाने में किसानों की भूमिका को मजबूत करने का आह्वान किया।
रांची में प्राकृतिक खेती और श्री अन्न पर कार्यशाला, स्वामी भावेशानंद ने किया संबोधित
रांची: दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र, मोराबादी में प्राकृतिक खेती और श्री अन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस विशेष मौके पर दिव्यायन कृषि विज्ञान केंद्र के स्वामी भावेशानंद ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और कृषि तथा किसानों की तरक्की के बिना देश की उन्नति की कल्पना करना पूरी तरह बेमानी है।
स्वामी भावेशानंद ने कहा कि केंद्र सरकार कृषि और किसानों के विकास को लेकर काफी गंभीर है। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री ने साल 2047 तक भारत को विश्व गुरु बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है और भारत के विश्व गुरु बनने का रास्ता सीधे तौर पर खेती और देश के अन्नदाताओं से ही होकर गुजरता है।
रासायनिक खेती से घट रही है मिट्टी की उर्वरा शक्ति
कार्यशाला को संबोधित करते हुए किसान मोर्चा, झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष पवन साहू ने किसानों को जागरूक किया। उन्होंने खेतों में रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से होने वाले विभिन्न दुष्प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। पवन साहू ने बताया कि रासायनिक खेती के निरंतर प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार घटती जा रही है, जिससे फसलों की उत्पादन लागत बढ़ रही है। इसके साथ ही इसका मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर भी बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाएं ताकि कम लागत में अधिक एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
श्री अन्न के पोषण और स्वास्थ्य संबंधी महत्व पर चर्चा
कार्यशाला के दौरान डॉ. विशाखा सिंह ने श्री अन्न के पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी महत्व पर किसानों को विस्तृत जानकारी दी। भारत मंथन लाइव न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, उन्होंने बताया कि मड़ुवा सहित अन्य मोटे अनाज कैल्शियम, आयरन, फाइबर एवं अन्य जरूरी पोषक तत्वों से पूरी तरह भरपूर होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने श्री अन्न से तैयार किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के खाद्य उत्पादों के नियमित सेवन से मानव शरीर को होने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में भी किसानों को विस्तार से समझाया।
