रांची के सदर अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है, जहां अब हर दिन ओपीडी में करीब 2000 मरीज पहुंच रहे हैं। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की उपलब्धता के चलते यह अस्पताल रिम्स को टक्कर दे रहा है और इसके कई इनडोर वार्ड पूरी तरह ओवरलोड हो चुके हैं।
रांची सदर अस्पताल बना मरीजों की पहली पसंद, रिम्स के बराबर पहुंची ओपीडी की संख्या
रांची: राजधानी रांची का सदर अस्पताल अब महज एक जिला अस्पताल नहीं रह गया है, बल्कि अपनी बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के दम पर यह मरीजों की पहली पसंद बन चुका है। चिकित्सा सुविधाओं में हुए व्यापक सुधार के कारण यहां इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में लगातार भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, स्थिति यह हो चुकी है कि कई मामलों में सदर अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान रिम्स (RIMS) के बिल्कुल बराबर पहुंच गई है। अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता, आधुनिक चिकित्सा इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन की वजह से आम जनता का भरोसा इस सरकारी अस्पताल पर लगातार मजबूत हो रहा है।
अस्पताल प्रबंधन द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) में हर दिन रिकॉर्ड संख्या में मरीज परामर्श और इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। राहत की बात यह है कि अब न केवल रांची शहर, बल्कि इसके आसपास के पड़ोसी जिलों और सुदूर ग्रामीण इलाकों से भी बड़ी तादाद में लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सदर अस्पताल का रुख कर रहे हैं।
इनडोर वार्ड हुए ओवरलोड, ऑनकोलॉजी विभाग में बेड बढ़ाने की मांग
कई विभागों के बेड पूरी तरह भरे
सदर अस्पताल की ओपीडी में बढ़ती भीड़ का सीधा असर अब यहां के इनडोर वार्डों (भर्ती सुविधा) पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अस्पताल के कई महत्वपूर्ण विभागों के बेड इस समय पूरी तरह से भर चुके हैं। वार्डों में भर्ती मरीजों की संख्या उनकी कुल निर्धारित क्षमता के बेहद करीब पहुंच गई है, जिससे प्रबंधन के सामने संसाधनों को सुव्यवस्थित करने की नई चुनौती खड़ी हो गई है।
कैंसर विंग के विस्तार की जरूरत
मरीजों के बढ़ते दबाव को देखते हुए चिकित्सा विशेषज्ञों और विभागीय प्रभारियों द्वारा कुछ खास विभागों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता जताई गई है। विशेष रूप से अस्पताल के ऑनकोलॉजी (कैंसर) विभाग में बेडों की संख्या को तत्काल बढ़ाने की मांग प्रबंधन से की गई है, ताकि गंभीर मरीजों को बिना किसी बाधा के समय पर भर्ती किया जा सके।
स्पेशलिस्ट और ऑन-कॉल डॉक्टरों की सेवा से रिम्स पर निर्भरता हुई कम
सभी प्रमुख विभागों में विशेषज्ञों की तैनाती
सदर अस्पताल की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण यहां मेडिसिन, सर्जरी, गायनेकोलॉजी (स्त्री रोग), पीडिया (बाल रोग), हड्डी रोग, नेत्र रोग और ईएनटी (नाक, कान, गला) जैसे सभी प्रमुख और विशेषज्ञ विभागों में क्वालिफाइड डॉक्टरों की नियमित मौजूदगी है। इसके साथ ही, अस्पताल में ‘ऑन कॉल डॉक्टर’ की बेहतरीन सेवा मिलने से भी मरीजों को काफी सहूलियत हो रही है।
स्थानीय स्तर पर मिल रहा है संपूर्ण इलाज
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में सदर अस्पताल की कार्यशैली, डॉक्टरों की समय पर उपलब्धता, त्वरित पैथोलॉजिकल जांच और मुफ्त दवाओं की सटीक व्यवस्था ने आम लोगों का विश्वास काफी हद तक बढ़ाया है। यही वजह है कि अब स्थानीय मरीजों को छोटे-मोटे उपचार या ऑपरेशनों के लिए रिम्स अथवा अन्य महंगे निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वे इस बढ़ती मांग को देखते हुए लगातार सुविधाओं के विस्तार और नए संसाधनों को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
आंकड़ों में समझिए: कैसे रिम्स को टक्कर दे रहा है रांची का सदर अस्पताल
राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स और जिला स्तरीय सदर अस्पताल के बीच मरीजों की संख्या का तुलनात्मक विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है:
| अस्पताल का नाम | ओपीडी में प्रतिदिन आने वाले मरीज | इनडोर वार्ड में भर्ती मरीज (औसत) |
| रिम्स (RIMS) | करीब 2,000 मरीज | 1,500 से अधिक मरीज |
| सदर अस्पताल (Sadar Hospital) | करीब 2,000 मरीज (कभी-कभी 2,100 के पार) | करीब 900 मरीज |
इन सरकारी आंकड़ों से साफ तौर पर समझा जा सकता है कि कैसे रांची का सदर अस्पताल चिकित्सा व्यवस्था और जन विश्वास के मामले में राज्य के शीर्ष मेडिकल कॉलेज को सीधी टक्कर दे रहा है।
