12 अक्टूबर 2026 को, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध प्रदर्शन के दौरान वकीलों की हिरासत, इंटरनेट बंद करने और यातायात पाबंदियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की याचिका पर 13 अक्टूबर को सुनवाई होगी, जबकि CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि वकीलों और मुकदमों की आवाजाही में रुकावट नहीं आनी चाहिए।
वकीलों की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के विरोध में प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा कुछ वकीलों को हिरासत में लिए जाने का मामला तूल पकड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट कामकाज में रुकावट और इंटरनेट बंद करने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और अन्य लोगों की तरफ से दायर की गई है। सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि इंटरनेट बहाल किया जाए और वकीलों को उनके पेशेवर काम से रोका न जाए।
मेट्रो संचालन और यातायात पाबंदियों पर निर्देश
शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा है कि जब तक कानून व्यवस्था को लेकर कोई बड़ी चुनौती न खड़ी हो, मेट्रो का संचालन सामान्य तरीके से होना चाहिए। दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान मेट्रो बंद किए जाने और वकीलों व पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ यह सुनवाई हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोगों को अपने पेशे से जुड़े काम करने से न रोका जाए।
सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी और अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सीनियर वकील प्रदीप राय ने अदालत के सामने इस मामले का जिक्र किया। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों से भी अपील की है कि सुप्रीम कोर्ट को इसमें नहीं घसीटा जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि वकीलों, मुकदमेबाजों और कोर्ट के स्टाफ की आवाजाही में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट 13 अक्टूबर 2026 को विस्तृत सुनवाई करेगा।
