लाइसेंस के 7 माह बाद भी रिम्स रांची में नहीं बनी किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट

रिम्स रांची में सात महीने बाद भी किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट न बनने से परेशान मरीज

राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) रांची को किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस मिले सात महीने बीत जाने के बाद भी जरूरी आधारभूत संरचना तैयार नहीं हो सकी है। अस्पताल में विशेष ओटी, आईसीयू और स्टाफ ट्रेनिंग अधूरी होने के कारण झारखंड के करीब 27 पंजीकृत मरीज सरकारी सुविधा का इंतजार करने या बाहर जाने को मजबूर हैं।

लाइसेंस मिलने के सात महीने बाद भी रिम्स में सुविधाएं अधूरी

रांची: राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में किडनी ट्रांसप्लांट सेवा शुरू करने की योजना प्रशासनिक सुस्ती और कागजी प्रक्रियाओं में उलझकर रह गई है। रिम्स को ट्रांसप्लांट का आधिकारिक लाइसेंस मिले सात महीने का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इसके लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं किया जा सका है।

अस्पताल में न तो समर्पित किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट, न ही विशेष ऑपरेशन थियेटर (ओटी) और आईसीयू बनकर तैयार हो पाए हैं। इसके अलावा डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों की ट्रेनिंग प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

कागजी प्रक्रियाओं में अटका प्रस्ताव, निजी अस्पताल निकला आगे

रिम्स के ट्रॉमा सेंटर के भीतर विशेष ओटी तैयार करने का प्रस्ताव फिलहाल फाइलों और कमेटियों के फेर में फंसा हुआ है। इसके विपरीत, इसी साल जनवरी 2026 में लाइसेंस प्राप्त करने वाले निजी राज अस्पताल ने अपनी यूनिट, ओटी और डॉक्टरों की टीम की ट्रेनिंग प्रक्रिया पूरी कर ली है।

रिम्स में हो रही लगातार देरी के कारण गंभीर रूप से बीमार मरीजों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

झारखंड में 35 लाख से अधिक किडनी मरीज, 27 वेटिंग लिस्ट में

आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में हर 10 में से एक व्यक्ति किडनी की बीमारी से पीड़ित है और राज्य में ऐसे मरीजों की संख्या 35 लाख से अधिक है। इनमें से 8 से 10 प्रतिशत मरीजों को नियमित डायलिसिस की आवश्यकता होती है।

नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) के पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड के 27 मरीज वर्तमान में किडनी ट्रांसप्लांट की वेटिंग लिस्ट में हैं, जिन्हें मजबूरी में राज्य के बाहर रुख करना पड़ रहा है।

रिम्स प्रशासन का दावा: जल्द शुरू होंगी सुविधाएं

मामले पर जानकारी देते हुए रिम्स के पीआरओ डॉ. शिशिर कुमार ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में जगह चिह्नित कर ली गई है। गठित कमेटी के सुझावों के आधार पर भवन निर्माण विभाग को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि एसओपी (SOP) तैयार कर ली गई है और जल्द ही सभी आवश्यक सुविधाएं शुरू होने की उम्मीद है।

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