चेक बाउंस केस: राजपाल यादव से CJI ने पूछा- फिल्म की तरह पैसा भी लापता?

नई दिल्ली में चेक बाउंस मामले में तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद अभिनेता राजपाल यादव

नई दिल्ली में अभिनेता राजपाल यादव से जुड़े 5 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत ने बुधवार को चुटकी ली। सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने अभिनेता को अपनी पैतृक संपत्ति बेचकर बकाया राशि चुकाने की अनुमति दी और उन्हें अच्छी फिल्में बनाते रहने की सलाह दी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हल्का-फुल्का माहौल

नई दिल्ली स्थित सर्वोच्च अदालत में अभिनेता राजपाल यादव और उनकी पत्नी से जुड़े 5 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले की सुनवाई के दौरान बुधवार को हल्का-फुल्का माहौल देखने को मिला। मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस लंबे समय से लंबित मामले पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने चुटकी लेते हुए पूछा, “तो क्या फिल्म के शीर्षक ‘अता पता लापता’ की तरह पैसा भी लापता हो गया?”

पैतृक संपत्ति बेचने की मिली अनुमति

अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित राजपाल यादव ने अपनी 2012 की फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स नामक एक निजी संस्था से लिए गए ऋण से उपजे बकाये को चुकाने के लिए अपनी पैतृक संपत्ति बेचने का अनुरोध किया, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया। पीठ ने नोट किया कि अभिनेता ने तुरंत 2 करोड़ रुपये के भुगतान की व्यवस्था कर ली है।

कोर्ट में प्रस्तुत किया गया डिमांड ड्राफ्ट

राजपाल यादव ने अदालत में 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट प्रस्तुत किया और बताया कि शेष 85 लाख रुपये संपत्ति के संभावित खरीदार द्वारा अगले सप्ताह तक दे दिए जाएंगे। अभिनेता के वकील ने पीठ को अवगत कराया कि संपत्ति का खरीदार भी अदालत में मौजूद है। वकील ने कहा कि वर्तमान में पितृ पक्ष चल रहा है, जिसके कारण खरीदार इस दौरान रजिस्ट्री कराने से बच रहा है और सोमवार से शुरू हो रही नवरात्रि के बाद बिक्री दस्तावेजों के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करना चाहता है।

सीजेआई की चेतावनी और राजपाल यादव का पक्ष

सुनवाई के दौरान पीठ ने पूर्व में राजपाल यादव के आचरण पर असंतोष व्यक्त किया और चेतावनी दी कि उनकी सजा बढ़ाई जा सकती है। पीठ ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता को उसकी राशि मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए ही बार-बार समय दिया गया था। इसके बाद माहौल को हल्का करते हुए सीजेआई ने अभिनेता से अच्छी फिल्में बनाने और लोगों का मनोरंजन करने को कहा।

अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए राजपाल यादव ने कहा कि 2012 की इस फिल्म के कारण उन्हें 17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और शिकायतकर्ता के 5 करोड़ रुपये अटके। उन्होंने बताया कि इस विवाद और स्थगनादेश के कारण 1,200 सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली उनकी फिल्म एक भी थिएटर में ठीक से प्रदर्शित नहीं हो सकी और पिछले 13 वर्षों में उन्हें भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।

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