भिलाई की सुष्मिता सिंह को बड़ी सफलता: UPSC IFS परीक्षा में हासिल की AIR 32

भिलाई की सुष्मिता सिंह ने UPSC भारतीय वन सेवा परीक्षा 2025 में 32वीं रैंक हासिल की।

छत्तीसगढ़ के भिलाई की सुष्मिता सिंह ने UPSC भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 32 हासिल कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। एक सेवानिवृत्त वन अधिकारी की बेटी सुष्मिता ने साल 2019 में इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ दी थी, जिसके बाद कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने अपने बचपन के सपने को साकार किया।

भिलाई की बेटी सुष्मिता सिंह ने UPSC IFS 2025 में लहराया परचम

भिलाई के लिए यह गर्व का क्षण है, क्योंकि स्थानीय निवासी सुष्मिता सिंह ने प्रतिष्ठित भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा 2025 में राष्ट्रीय स्तर पर 32वीं रैंक प्राप्त की है। उनकी यह सफलता कई वर्षों की निरंतर तैयारी, असफलताओं और खुद पर संदेह के क्षणों से ऊपर उठने के बाद मिली है। सुष्मिता ने साबित कर दिया है कि अटूट लगन से किसी भी कठिन लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

संघर्ष और समर्पण का सफर

सुष्मिता की सफलता की राह आसान नहीं थी। उन्होंने कई बार UPSC मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन अंतिम चयन में वह कुछ अंकों से चूक जाती थीं। वह UPES देहरादून से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट हैं और उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल भिलाई से पूरी की है। साल 2019 में, उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की नौकरी से इस्तीफा दे दिया ताकि वह पूरी तरह से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

सुष्मिता अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, विशेष रूप से अपने पिता भानु प्रताप सिंह को देती हैं। उनके पिता स्वयं वन विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और उन्होंने ही बचपन से सुष्मिता के भीतर इस सेवा में शामिल होने की महत्वाकांक्षा जगाई थी।

वन्यजीव संरक्षण और समुदाय का विकास है लक्ष्य

वनों और वन्यजीवों के साथ गहरे जुड़ाव वाले परिवार से आने के कारण, सुष्मिता का प्रकृति के प्रति बचपन से ही भावनात्मक लगाव रहा है। अपनी नई भूमिका में, वह वन्यजीव संरक्षण पर काम करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि जंगलों के पास रहने वाले स्थानीय समुदायों को भी विकास और संरक्षण के प्रयासों में शामिल किया जाए।

भविष्य के उम्मीदवारों के लिए सफलता का मंत्र

अपनी यात्रा को याद करते हुए सुष्मिता ने बताया कि अनुशासन, निरंतरता और माता-पिता का समर्थन ही उनकी उपलब्धि का आधार रहा है। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, सुष्मिता का संदेश है कि असफलताओं को हार मानने का कारण नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की सीढ़ी बनाना चाहिए। उनकी माँ, हिना सिंह ने बताया कि परिवार ने हमेशा घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखने पर ध्यान दिया, जिससे सुष्मिता को बिना किसी दबाव के अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिली।

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