रांची स्थित राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में आउटसोर्सिंग के जरिए हुई नियुक्तियों में गंभीर घूसखोरी के आरोप लगे हैं। सांसद प्रतिनिधि राजकिशोर ने रिम्स प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपकर भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली का दावा किया है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से कराने की मांग की है।
रिम्स में नौकरी के नाम पर लाखों की अवैध वसूली, सांसद प्रतिनिधि ने खोला मोर्चा
रांची, झारखंड: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में आउटसोर्सिंग के जरिए की गई विभिन्न पदों पर नियुक्तियों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सांसद प्रतिनिधि राजकिशोर ने रिम्स प्रशासन को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपकर भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से बड़े पैमाने पर अवैध वसूली की गई है।
इस कथित घोटाले की गंभीरता को देखते हुए सांसद प्रतिनिधि ने पूरे मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।
इन पदों पर बहाली के नाम पर डेढ़ लाख तक की वसूली का आरोप
शिकायत के अनुसार, रिम्स में नर्सिंग स्टाफ, कंप्यूटर ऑपरेटर, वार्ड बॉय, मल्टी टास्किंग स्टाफ, लिफ्ट ऑपरेटर, लैब टेक्नीशियन और पैरामेडिकल स्टाफ समेत विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर मानव बल (मैनपावर) उपलब्ध कराने का जिम्मा एक निजी आउटसोर्स एजेंसी को मिला है। इस कार्य का टेंडर ‘एमएस सामंता सिक्योरिटी एंड इंटेलीजेंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ नामक एजेंसी को दिया गया है।
आरोप है कि इस आउटसोर्सिंग एजेंसी ने रिम्स के ही कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से एक बड़ा सिंडिकेट चलाया। नौकरी पाने की चाहत रखने वाले बेरोजगार अभ्यर्थियों से प्रति पद एक से डेढ़ लाख रुपये तक की अवैध राशि वसूली गई है।
जमीन और गहने गिरवी रखने को मजबूर हुए बेरोजगार अभ्यर्थी
लिखित शिकायत में इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि राज्य में बेरोजगारी से जूझ रहे युवक-युवतियां नौकरी पाने की उम्मीद में बेहद कठिन कदम उठाने को मजबूर हुए। कई अभ्यर्थियों ने इस अवैध राशि को चुकाने के लिए अपनी जमीनें बेच दीं, माताओं-बहनों के गहने गिरवी रख दिए या फिर भारी ब्याज पर कर्ज लिया।
दावा किया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए सिंडिकेट द्वारा करोड़ों रुपये की अवैध उगाही की जा चुकी है और यह सिलसिला अब भी लगातार जारी है। सांसद प्रतिनिधि राजकिशोर का कहना है कि इस भ्रष्टाचार की जानकारी पहले भी रिम्स के संबंधित उच्च अधिकारियों और चिकित्सा अधीक्षक को मौखिक रूप से दी गई थी, लेकिन प्रबंधन स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
स्वास्थ्य मंत्री और अपर मुख्य सचिव तक पहुंची शिकायत
मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सांसद प्रतिनिधि ने इस शिकायत की प्रतिलिपि (कॉपी) राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को भी भेजी है। इसके बाद से रिम्स प्रशासनिक हलके में हड़कंप मचा हुआ है।
