रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहरा गया है। नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापक संघ ने जेट (JET) परीक्षा को रद्द करने, विवादित टीडीपीएल (TDPL) एजेंसी की निष्पक्ष जांच कराने और पिछले नौ वर्षों से कार्यरत नीड बेस्ड शिक्षकों के स्थायीकरण की मांग उठाई है।
रांची में JPSC की परीक्षा प्रक्रिया और एजेंसी पर उठे गंभीर सवाल
झारखंड की राजधानी रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा प्रक्रिया पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, प्रथम, द्वितीय और तृतीय सिविल सेवा परीक्षा तथा वर्ष 2008 की व्याख्याता नियुक्ति विवाद के बाद अब वर्तमान परीक्षा प्रणालियों पर भी संशय जताया जा रहा है।
विवादित TDPL एजेंसी से परीक्षा कराने के आरोप
आरोप हैं कि JPSC द्वारा आयोजित झारखंड पात्रता परीक्षा (JET), सिविल सेवा, APP, सिविल जज और वन विभाग जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया कथित रूप से एक विवादित और ब्लैकलिस्टेड एजेंसी (TDPL) के माध्यम से संचालित की गई। यह भी आरोप लगाया गया है कि गोपनीयता के नाम पर आयोग के सदस्यों को पूरी प्रक्रिया से अलग रखा गया, जिससे परीक्षा की पारदर्शिता प्रभावित हुई।
JET परीक्षा रद्द करने और उच्चस्तरीय जांच की मांग
नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापक संघ के डॉ. त्रिभुवन कुमार साही ने विवादित एजेंसी के माध्यम से कराई गई सभी परीक्षाओं की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
“यदि बिना किसी सुधार और निष्पक्ष जांच के परीक्षाएं कराई जाती हैं, तो राज्य में वर्ष 2008 के व्याख्याता नियुक्ति विवाद जैसी स्थिति फिर से पैदा हो सकती है। इसका सबसे बड़ा नुकसान ईमानदार अभ्यर्थियों को होगा।” — डॉ. त्रिभुवन कुमार साही
9 वर्षों से कार्यरत नीड बेस्ड शिक्षकों के स्थायीकरण की मांग
संघ ने झारखंड के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में वर्ष 2017 से कार्यरत नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापकों का मुद्दा भी उठाया है। संघ के अनुसार, ये सभी शिक्षक NET, JET और Ph.D. जैसी शैक्षणिक योग्यताएं रखते हैं और पिछले नौ वर्षों से राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था में अपना योगदान दे रहे हैं। इसलिए उन्हें नियमित और स्थायी करने की मांग की गई है।
