झारखंड हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारी के बकाया भुगतान मामले में राज्य सरकार की दोनों लेटर पेटेंट अपीलों को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर सभी लंबित राशि का भुगतान करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।
रिटायर कर्मचारी बकाया मामले में झारखंड हाईकोर्ट का सख्त रुख
झारखंड हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अधिकारों पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की दो लेटर पेटेंट अपीलों को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कर्मचारी की सभी बकाया राशि का भुगतान चार सप्ताह के भीतर किया जाए।
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्ष 2013 में सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारी को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल रिटायर हो जाने के आधार पर किसी कर्मचारी के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।
वन एवं पर्यावरण विभाग के कर्मचारी शेख इज्जतुल्लाह से जुड़ा मामला
यह मामला वन एवं पर्यावरण विभाग से जुड़े सेवानिवृत्त कर्मचारी शेख इज्जतुल्लाह का है। इससे पहले एकल पीठ ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला दिया था, जिसे राज्य सरकार ने एलपीए (LPA) के जरिए चुनौती दी थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार की अपील खारिज कर दी।
अदालत ने कहा कि समान परिस्थितियों वाले दूसरे कर्मचारी को जब सभी सेवानिवृत्ति लाभ दिए गए हैं, तो शेख इज्जतुल्लाह के साथ अलग व्यवहार का कोई उचित आधार नहीं है। इसके साथ ही कोर्ट ने पूर्व प्रभाव से बर्खास्तगी के आदेश पर भी सवाल उठाते हुए इसे प्रथम दृष्टया अवैध करार दिया।
भविष्य निधि भुगतान में देरी पर हाईकोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान भविष्य निधि (Provident Fund) के भुगतान में हुई देरी को लेकर भी हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई।
मामले की सुनवाई के अंत में जब राज्य सरकार की ओर से बकाया राशि के भुगतान का आश्वासन दिया गया, तब अदालत ने चार सप्ताह की समय-सीमा तय करते हुए सभी लंबित भुगतानों को पूरा करने का अंतिम निर्देश जारी किया।
