उच्चतम न्यायालय ने गुजरात उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है, जिसमें अदालती शुल्क न भरने के कारण वक्फ मुकदमों को खारिज करने के फैसले को बरकरार रखा गया था। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने सुनवाई स्वीकार करते हुए प्रतिवादियों को छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में गुजरात उच्च न्यायालय के वक्फ आदेश को चुनौती
अदालती शुल्क न भरने के कारण वक्फ मामलों को खारिज करने के फैसले को सही ठहराने वाले गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में सुनवाई शुरू हो गई है। शीर्ष अदालत ने अहमदाबाद सुन्नी मुस्लिम वक्फ कमेटी द्वारा दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए सुनवाई स्वीकार कर ली है।
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने इस मामले में 7 अगस्त को जारी अपने आदेश में प्रतिवादी पक्षों को नोटिस जारी कर छह हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
वक्फ अधिनियम में कोर्ट फीस का प्रावधान न होने का तर्क
अहमदाबाद सुन्नी मुस्लिम वक्फ कमेटी की ओर से अधिवक्ता एजाज मकबूल के माध्यम से दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि उच्च न्यायालय इस कानूनी पहलू पर विचार करने में विफल रहा। याचिका के अनुसार, न तो वक्फ अधिनियम और न ही इससे संबंधित नियमों में वक्फ न्यायाधिकरण के समक्ष अदालती शुल्क के भुगतान का कोई प्रावधान शामिल है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कानून और नियम दोनों ही स्पष्ट रूप से अदालती शुल्क के भुगतान को बाहर रखते हैं, इसलिए शुल्क न देने के आधार पर मुकदमों को खारिज करना तर्कसंगत नहीं है।
उच्च न्यायालय के पुराने फैसलों के बाद बढ़ा विवाद
उल्लेखनीय है कि गुजरात उच्च न्यायालय ने इस वर्ष जनवरी में अपने दिसंबर 2025 के फैसले का हवाला देते हुए वक्फ याचिकाओं को खारिज कर दिया था। उस फैसले में उच्च न्यायालय ने कहा था कि वक्फ संस्थानों को राज्य वक्फ न्यायाधिकरण के समक्ष अदालती शुल्क भरने से किसी भी प्रकार की छूट प्राप्त नहीं है।
इससे पूर्व, 17 दिसंबर 2025 को भी उच्च न्यायालय ने वक्फ संस्थाओं की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें अपर्याप्त अदालती शुल्क के कारण वक्फ संपत्तियों के विवादों की कार्यवाही समाप्त करने के न्यायाधिकरण के आदेश को चुनौती दी गई थी। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है।
