उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में कोंच विकासखंड के गोरा करनपुर गांव में श्मशान घाट न होने के कारण ग्रामीणों को बारिश के बीच टीनशेड लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। आजादी के 80 साल बाद भी बुनियादी सुविधा न मिलने से आहत ग्रामीणों ने अधूरे पड़े श्मशान घाट का निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग की है।
बारिश और कीचड़ के बीच अंतिम संस्कार की मजबूरी
जालौन जिले के कोंच विकासखंड स्थित गोरा करनपुर गांव में श्मशान घाट की व्यवस्था न होने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में बारिश के बीच ग्रामीणों को खुले स्थान पर टीनशेड लगाकर एक मृतक का अंतिम संस्कार करना पड़ा।
आसमान से बरसते पानी और चारों तरफ फैले कीचड़ तथा दलदल के बीच परिजनों ने अपने प्रियजन को अंतिम विदाई दी। स्थानीय लोगों के अनुसार हर बरसात में अंतिम संस्कार के लिए ऐसी ही गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
12 साल से अधूरा पड़ा है निर्माण कार्य
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में श्मशान घाट निर्माण के लिए लगभग 12 वर्ष पहले सांसद निधि से काम शुरू कराया गया था। हालांकि, इतने लंबे अंतराल के बाद भी यह निर्माण कार्य आज तक अधूरा पड़ा हुआ है।
व्यवस्थित स्थान न होने और रास्ते में पानी भरने के कारण शव को अंतिम संस्कार स्थल तक ले जाना भी बेहद कठिन हो जाता है। ऐसे में ग्रामीण तिरपाल या टीनशेड का सहारा लेकर किसी तरह दाह संस्कार करने को मजबूर हैं।
शिकायतों के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि पुष्पेंद्र पटेल और ग्रामीणों का कहना है कि समस्या को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की जा चुकी है। हर बार केवल आश्वासन दिया जाता है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अधूरे श्मशान घाट का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को इस तरह की अमानवीय परेशानी से न गुजरना पड़े।
