भोपाल: आरजीपीवी यूनिवर्सिटी में पेपर चोरी के बाद परीक्षा रद्द, एफआईआर दर्ज

भोपाल के राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में पेपर चोरी और परीक्षा रद्द होने के बाद प्रदर्शन करते छात्र।

मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) में शुक्रवार सुबह चौथी छमाही (फोर्थ सेमेस्टर) की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले प्रश्न पत्र गायब होने के कारण रद्द कर दी गई। इस घटना के बाद छात्रों ने परिसर में भारी विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।

आरजीपीवी यूनिवर्सिटी में परीक्षा से ठीक पहले पेपर चोरी, छात्रों का भारी हंगामा

भोपाल: मध्य प्रदेश की एकमात्र राज्य संचालित तकनीकी यूनिवर्सिटी राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) एक बड़े विवाद में घिर गई है। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (यूटीडी) के तहत शुक्रवार सुबह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग (AIML) कोर्स की चौथी छमाही की परीक्षा आयोजित होनी थी। लेकिन जब छात्र परीक्षा देने पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि परीक्षा रद्द कर दी गई है।

परीक्षा शुरू होने के ठीक पहले अंतिम समय में हुए इस फैसले के बाद पूरे विश्वविद्यालय परिसर में भारी हंगामा और आक्रोश फैल गया। इस दौरान छात्रों को जानकारी मिली कि परीक्षा शाखा की एक अलमारी से प्रश्न पत्रों के नौ बंडल कथित तौर पर गायब (चोरी) हैं। इसके बाद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं और नाराज छात्रों ने कुलपति कार्यालय पर पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

अलमारी का ताला तोड़े बिना उड़ाए प्रश्न पत्र, अंदरूनी सूत्र पर शक

घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीमों ने अपनी प्रारंभिक जांच शुरू की। जांच में सामने आया है कि चोर ने जमीन से लगभग 5.25 फीट ऊपर स्थित एक वेंटिलेशन (रोशनदान) के रास्ते बिना किसी बाहरी सहायता के कमरे के भीतर प्रवेश किया था।

पुलिस के अनुसार, अंदर घुसने के बाद घुसपैठिए ने दराज में रखी चाबी उठाई और अलमारी का ताला तोड़े बिना ही बेहद आसानी से प्रश्न पत्रों के नौ बंडल लेकर फरार हो गया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने विस्तृत जांच के लिए घटनास्थल से उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट्स) और वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए हैं। इस वारदात के तरीके को देखते हुए पुलिस को इस घटना में किसी अंदरूनी सूत्र (यूनिवर्सिटी के ही किसी व्यक्ति) के शामिल होने का गहरा संदेह है।

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