झारखंड में JPSC और JSSC नियुक्ति विवाद पर छात्रों के प्रदर्शन और लाठीचार्ज को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपने हक की मांग कर रहे निहत्थे छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग करना निंदनीय है, जो सरकार की युवा विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
छात्रों के आंदोलन पर लाठीचार्ज की चंपाई सोरेन ने की निंदा
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं (JPSC और JSSC) में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ राज्यभर में अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन जारी है। 24 जिलों में आयोजित पुतला दहन और पुलिस लाठीचार्ज पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने सरकार के रुख को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य बनने के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा और अनुशासित छात्र आंदोलन है, जिसे कुचलने की कोशिश की जा रही है।
नियुक्ति धांधली की CBI जांच कराने की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांग परीक्षाओं में हुई धांधली की सीबीआई (CBI) जांच कराना है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में कोई भी भर्ती प्रक्रिया बिना भ्रष्टाचार के पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब CID जांच के बाद पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते जेल जा चुके हैं और आयोग के एक सदस्य के पीए की गिरफ्तारी हो चुकी है, तो उस संबंधित सदस्य पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
छात्रों के प्रदर्शन को राजनीतिक रंग देने का आरोप
राज्य के 24 जिलों में हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए चंपाई सोरेन ने कहा कि छात्र किसी राजनीतिक दल के झंडे के बिना सड़कों पर उतरे थे। ऐसे में उनके आंदोलन को भाजपा से जोड़ना और बदनाम करना गलत है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि राज्य की सरकारी नौकरियों में करीब 150 बाहरी अभ्यर्थियों का चयन किया गया है, जो स्थानीय युवाओं के अधिकारों पर डाका है और इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
