छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित गंगरेल बांध से जैन धर्म के 24वें तीर्थंकरों में शामिल भगवान नेमीनाथ की एक प्राचीन व दुर्लभ प्रतिमा मिली है। पर्यटकों द्वारा पहचान किए जाने के बाद संगमरमर की इस सदियों पुरानी प्रतिमा को धमतरी के दिगंबर जैन मंदिर में सुरक्षित रखवा दिया गया है।
धमतरी के गंगरेल बांध से मिली भगवान नेमीनाथ की प्राचीन प्रतिमा
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित प्रसिद्ध गंगरेल बांध से एक बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक घटना सामने आई है। बांध क्षेत्र से जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान नेमीनाथ की एक सदियों पुरानी प्रतिमा बरामद हुई है।
इस दुर्लभ प्रतिमा के मिलने की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल तथा विशेष आस्था का माहौल बन गया है।
बोटिंग चालक के पास मिली संगमरमर की प्रतिमा
मिली जानकारी के अनुसार, गंगरेल बांध घूमने पहुंचे कुछ जैन धर्मावलंबी पर्यटकों की नजर अचानक एक स्थानीय बोटिंग चालक के पास रखी इस प्रतिमा पर पड़ी। पर्यटकों ने बारीक निरीक्षण के बाद इसकी पहचान जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमीनाथ जी की प्रतिमा के रूप में की।
यह प्रतिमा श्वेत संगमरमर पत्थर से निर्मित है और देखने में काफी प्राचीन प्रतीत होती है।
दिगंबर जैन मंदिर में सुरक्षित रखी गई प्रतिमा
प्रतिमा की धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को देखते हुए इसे तत्काल धमतरी स्थित दिगंबर जैन मंदिर में लाकर पूरी सुरक्षा और सम्मान के साथ रख दिया गया है।
जैन समाज के लोगों का मानना है कि यह प्रतिमा ऐतिहासिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है और इसके मिलने से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बल मिलेगा।
पुरातत्व विभाग करेगा प्राचीनता की जांच
भारत मंथन लाइव न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह प्रतिमा गंगरेल बांध तक कैसे पहुंची और इसकी वास्तविक समयावधि क्या है।
प्रतिमा की प्राचीनता, कालखंड और ऐतिहासिक महत्व का सटीक मूल्यांकन करने के लिए जल्द ही पुरातत्व विभाग द्वारा इसकी विस्तृत वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इसके इतिहास से जुड़े रहस्य उजागर हो सकेंगे।
