गुमला, 17 अगस्त: गुमला समाहरणालय में आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के बैनर तले आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं ने धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने अपने काम, मानदेय और विभिन्न सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को उठाते हुए सरकार से मांगों पर कार्रवाई की अपील की।
कम मानदेय और अतिरिक्त कार्यों का मुद्दा
धरना प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं ने कहा कि वे लगातार पोषण और शिक्षण से जुड़े कार्य कर रही हैं। इसके अलावा सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यों में भी उनकी सेवाएं ली जाती हैं।
कर्मचारियों ने बताया कि मैया सम्मान योजना के सत्यापन, एसआईआर और अन्य सरकारी कार्यों की जिम्मेदारी भी उन्हें दी जाती है। उनका कहना है कि इन अतिरिक्त जिम्मेदारियों के बावजूद उन्हें बहुत कम राशि मिलती है।
आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ ने उठाई कई मांगें
आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की गुमला जिला अध्यक्ष ममता गुप्ता ने कहा कि उनसे तरह-तरह के काम लिए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें मात्र 10,000 रुपये मिलते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पेंशन अथवा अन्य तरह का लाभ नहीं मिल रहा है।
ममता गुप्ता के अनुसार, कागजों में कई तरह के लाभ बताए जाते हैं, लेकिन किसी अनहोनी की स्थिति में उनके परिजनों को लाभ नहीं मिलता। उन्होंने यह भी कहा कि अनुकंपा के आधार पर उनकी बेटियों को नौकरी तक नहीं मिल पाती।
मानदेय को लेकर स्पष्टता नहीं होने का आरोप
झारखंड प्रदेश अध्यक्ष रीमा देवी ने कहा कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से अलग-अलग राशि दी जाती है और वह भी अलग-अलग समय पर। उनका कहना है कि उन्हें कितना मानदेय मिल रहा है और उनका मानदेय कितना निर्धारित है, इसे लेकर अब तक स्पष्टता नहीं हो पा रही है।
उन्होंने कहा कि सेविका-सहायिकाओं को क्षेत्र भ्रमण समेत विभिन्न कार्य करने पड़ते हैं, लेकिन इसके लिए टीए-डीए जैसी कोई राशि नहीं मिलती। उनके अनुसार, काम के दौरान उन्हें अपना घर-बार छोड़कर जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं और सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके हाथ में कोई पर्याप्त लाभ नहीं रहता।
रीमा देवी ने कहा कि सरकार महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात करती है, लेकिन आंगनबाड़ी कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।
सरकारी योजनाओं के कार्यों का भी दिया हवाला
आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की पदाधिकारी फूलमती देवी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों की ओर से उनसे अलग-अलग कार्य लिए जाते हैं। उन्होंने एसआईआर और मैया सम्मान योजना के सत्यापन जैसे कार्यों का उल्लेख किया।
फूलमती देवी ने कहा कि कोरोना के समय भी आंगनबाड़ी कर्मचारियों से काफी काम लिया गया। उनके अनुसार, इसके बावजूद उचित वेतनमान या अन्य राशि नहीं दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि जमीन पर काम करने वाली आंगनबाड़ी कर्मचारी आर्थिक समस्याओं से जूझ रही हैं। उनका कहना है कि जिन बच्चों के पोषण और देखभाल का काम वे करती हैं, अपने बच्चों के भविष्य को लेकर उन्हें खुद कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
फूलमती देवी ने कहा कि वर्ष 1975 से आंगनबाड़ी योजना संचालित है, लेकिन कर्मचारियों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बीमारी या अन्य जरूरत के समय कर्मचारियों को साहूकार से कर्ज लेकर खर्च चलाना पड़ता है।
धरना प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की ओर से अपनी विभिन्न समस्याओं और मांगों को सामने रखा गया। कर्मचारियों ने सरकार से इन मुद्दों पर संज्ञान लेकर समाधान की मांग की।
