उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में धारचूला स्थित लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार शनिवार को आधिकारिक रूप से पुनः शुरू हो गया। 16 पंजीकृत व्यापारियों और 4 सहायकों का पहला 20-सदस्यीय भारतीय दल चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र स्थित तकलाकोट मंडी पहुंच गया है, जहां व्यापारिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं।
लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार की आधिकारिक शुरुआत
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से भारत और चीन के बीच पारंपरिक सीमा व्यापार शनिवार को आधिकारिक रूप से शुरू हो गया। भारतीय व्यापारियों का पहला दल सीमा पार कर चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र स्थित तकलाकोट बाजार पहुंच चुका है। इस व्यापार के शुरू होने से सीमावर्ती क्षेत्रों की पारंपरिक व्यावसायिक गतिविधियों को नया बल मिला है।
20-सदस्यीय भारतीय दल पहुंचा तकलाकोट
धारचूला के उपजिलाधिकारी (SDM) आशीष जोशी ने जानकारी दी कि भारत-तिब्बत व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रौकली, 16 पंजीकृत व्यापारियों और चार सहायकों सहित 20-सदस्यीय दल ने शुक्रवार शाम 5 बजे गुंजी स्थित इमिग्रेशन कार्यालय में जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं।
लिपुलेख दर्रे पर औपचारिकताएं पूरी कर मिली प्रवेश की अनुमति
दल के सदस्यों ने रात नाभिक ढांग (Nabhidhang) में बिताई। शनिवार सुबह लगभग 10:15 बजे चीन के अधिकारियों ने लिपुलेख दर्रे पर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराईं। इसके बाद भारतीय व्यापारियों ने तिब्बती क्षेत्र में प्रवेश किया और व्यापारिक गतिविधियां शुरू करने के लिए तकलाकोट मंडी के लिए प्रस्थान किया।
पुराने स्टॉक और पंजीकृत व्यापारियों को प्राथमिकता
SDM आशीष जोशी ने स्पष्ट किया कि चीनी प्रशासन के निर्देशों के अनुसार शुरुआती चरण में केवल उन पूर्व पंजीकृत व्यापारियों को प्रवेश दिया गया है जो पहले भी व्यापार में शामिल रहे हैं। वर्तमान दल भारत से कोई नया सामान लेकर नहीं गया है, बल्कि वे तकलाकोट में पहले से मौजूद माल के माध्यम से ही व्यापार संचालन और कागजी औपचारिकताएं पूरी करेंगे।
आगामी दलों की रवानगी के लिए चीनी प्रशासन से समन्वय
प्रशासन द्वारा आगामी व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों की रवानगी की तिथियां तय करने के लिए चीनी प्रशासन के साथ ईमेल के माध्यम से नियमित पत्राचार किया जा रहा है। अनुमति और तिथियां प्राप्त होते ही अन्य पंजीकृत व्यापारियों को भी चरणबद्ध तरीके से तकलाकोट भेजा जाएगा। इस कदम से स्थानीय अर्थव्यवस्था और सीमावर्ती निवासियों की आजीविका को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
