यूनिवर्सिटी कॉलेज डबलिन (UCD) की 1976 की फुटबॉल टीम के 18 सदस्य अपनी ऐतिहासिक चीन यात्रा की 50वीं वर्षगांठ मनाने के लिए वापस चीन पहुंचे हैं। 1976 में यह चीन का दौरा करने वाली पहली पश्चिमी फुटबॉल टीम थी। टीम के सदस्यों ने शंघाई में अपने पुराने प्रतिस्पर्धियों से मुलाकात की और पांच दशकों में आए बदलावों को देखकर आश्चर्य व्यक्त किया।
1976 की ऐतिहासिक चीन यात्रा और 50 साल बाद की वापसी
जब पैडी ड्वायर 1976 में पहली बार चीन पहुंचे थे, तो वहां के लोग उन्हें और उनकी टीम को देखने के लिए उमड़ पड़े थे। उस समय चीन सांस्कृतिक क्रांति के बाद एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा था। ड्वायर ने याद करते हुए बताया, “उस समय सड़कों पर केवल साइकिलें होती थीं, कारें न के बराबर थीं।” 18 वर्षीय कप्तान के रूप में ड्वायर और उनकी 24 सदस्यीय टीम आयरलैंड और चीन के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने से पहले ही वहां पहुंच गई थी।
‘चाँद पर जाने जैसा’ था चीन का दौरा
उस समय आयरलैंड में लोगों का मानना था कि चीन जाना ‘चाँद पर जाने’ जैसा असंभव काम है। फंड इकट्ठा कर जब यह टीम चीन पहुंची, तो उन्हें इतिहास के एक बड़े मोड़ का गवाह बनने का मौका मिला। टीम की यात्रा के दौरान ही 9 सितंबर 1976 को माओत्से तुंग का निधन हो गया था। ड्वायर ने उस पल को याद करते हुए कहा, “शंघाई के बगीचों में जनता का शोक प्रदर्शन अविश्वसनीय था।” टीम ने माओ के जन्मस्थान हुनान प्रांत जाकर श्रद्धांजलि भी दी थी।
शंघाई में पुराने खिलाड़ियों से पुनर्मिलन
शंघाई स्टेडियम में टीम के सदस्यों ने अपने पुराने चीनी प्रतिस्पर्धियों से मुलाकात की, जिनके खिलाफ उन्होंने 50 साल पहले मैच खेला था। ड्वायर ने मुस्कुराते हुए कहा, “वे आज भी हमसे कहीं ज्यादा फिट और चुस्त दिख रहे थे।” हालांकि उस समय चीन के खिलाफ खेला गया मैच (जिसमें टीम 4-1 से हार गई थी) उनके जीवन की एक अमिट याद बन गया है।
चीन में आए बदलावों से चकित
50 साल बाद वापस आकर ड्वायर और उनकी टीम चीन के विकास को देखकर दंग रह गई। “अब यहां के मोटरवे, इमारतें और स्वच्छता अविश्वसनीय है,” ड्वायर ने कहा। उन्होंने यह भी आशा जताई कि भविष्य में आयरलैंड और चीन दोनों टीमें फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई करें और उनके बीच एक बार फिर मुकाबला हो।
