झारखंड सरकार का बड़ा फैसला: पीड़ितों के मुआवजे के लिए 10.04 करोड़ जारी, धनबाद-गुमला को मिला सबसे ज्यादा फंड

झारखंड सरकार ने अपराध पीड़ितों को आर्थिक मुआवजा देने के लिए धनबाद और गुमला समेत 13 जिलों को फंड जारी किया।

झारखंड सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत ‘झारखंड विक्टिम कंपनसेशन स्कीम 2012 (संशोधित)’ के लिए 10.04 करोड़ रुपये जारी किए हैं। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, इस राशि से राज्य के 13 जिलों के अपराध पीड़ितों और उनके आश्रितों को आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिसमें धनबाद और गुमला को सर्वाधिक 2-2 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं।

झारखंड विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत 13 जिलों के लिए 10.04 करोड़ रुपये आवंटित

धनबाद: झारखंड सरकार ने अपराध पीड़ितों और उनके आश्रितों को फौरी राहत देने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अंतर्गत आने वाले अभियोजन निदेशालय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ‘झारखंड विक्टिम कंपनसेशन स्कीम 2012 (संशोधित)’ के तहत कुल 10.04 करोड़ रुपये की वित्तीय राशि जारी कर दी है।

यह आवंटित राशि राज्य के 13 चयनित जिलों में अपराध से प्रभावित पीड़ितों को आर्थिक सहायता और मुआवजा प्रदान करने के लिए उपयोग में लाई जाएगी। सरकार के इस कदम से सैकड़ों पीड़ित परिवारों को समय पर सरकारी वित्तीय सहायता मिलने की राह साफ हो गई है।

धनबाद और गुमला जिले को मिला सबसे अधिक 2-2 करोड़ का फंड

राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस वित्तीय आवंटन में गुमला और धनबाद जिले को प्राथमिकता दी गई है। इन दोनों जिलों को सबसे अधिक दो-दो करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया गया है।

इसके अतिरिक्त, सरायकेला-खरसावां, गोड्डा, पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर), लातेहार और सिमडेगा जिलों में से प्रत्येक को एक-एक करोड़ रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है।

अन्य प्रभावित जिलों का जिलावार आवंटन विवरण

झारखंड के अन्य छह जिलों के लिए निर्धारित की गई मुआवजा राशि का विवरण इस प्रकार है:

जिलाआवंटित राशि
कोडरमा60.50 लाख रुपये
रामगढ़60.25 लाख रुपये
खूंटी18 लाख रुपये
साहिबगंज12 लाख रुपये
दुमका6 लाख रुपये

केवल पीड़ित मुआवजा योजना में खर्च करने के कड़े निर्देश

“इस राशि का उपयोग केवल पीड़ित प्रतिकर (Victim Compensation) योजना के तहत ही किया जाएगा। फंड का किसी अन्य प्रशासनिक या विकास कार्य में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।” — राज कुमार सिंह, अभियोजन निदेशक।

अभियोजन निदेशक राज कुमार सिंह ने राशि के उपयोग को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस धनराशि को किसी भी अन्य प्रशासनिक, कार्यालयी या विकासात्मक कार्यों में डाइवर्ट नहीं किया जा सकता है।

जिलाधिकारियों को सौंपी गई वित्तीय पारदर्शिता की जिम्मेदारी

योजना के सफल और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए सरकार ने संबंधित जिलों के उपायुक्तों (DC) और निकासी पदाधिकारियों को विशेष जवाबदेही सौंपी है। इन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे खर्च की गई राशि का समय पर भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करें और इसकी विस्तृत रिपोर्ट विभाग को सौंपें।

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