झारखंड राज्यसभा चुनाव: क्रॉस वोटिंग और ‘4 वोट’ का खेल बना बड़ा ट्विस्ट

रांची में झारखंड राज्यसभा चुनाव की रणनीति को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात करते कांग्रेस नेता।

रांची में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है, जहां 81 सदस्यीय विधानसभा के मौजूदा गणित के बीच दल-बदल और क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं तेज हैं। महागठबंधन और भाजपा के बीच दूसरी सीट को लेकर कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।

झारखंड राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी दांव-पेंच तेज, हेमंत सोरेन मजबूत स्थिति में

रांची: झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। राज्य के सियासी गलियारों में इन दिनों दल-बदल, क्रॉस वोटिंग और विधायकों को मतदान से अनुपस्थित कराने जैसे विभिन्न रणनीतिक दांव-पेंचों की चर्चाएं जोरों पर हैं। वर्तमान परिस्थितियों में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाले महागठबंधन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फिलहाल मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे अपने परिवार के किसी सदस्य को राज्यसभा भेजने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, हालांकि दोनों सीटें महागठबंधन के पाले में जाएंगी या नहीं, इसे लेकर अभी संशय बना हुआ है।

राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ा तनाव, दिल्ली आलाकमान से होगी चर्चा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के एक बयान ने इस चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पार्टी सिर्फ संख्या बल पर निर्भर नहीं रहेगी और पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। पार्टी अंतरात्मा की आवाज के आधार पर समर्थन जुटाने का प्रयास कर रही है।

दूसरी तरफ, कांग्रेस की सक्रियता भी क्षेत्र में अचानक बढ़ गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता व झारखंड प्रभारी के राजू, तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर रणनीति पर विचार-विमर्श किया। इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने बयान दिया कि उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम फैसला दिल्ली आलाकमान से विस्तृत बातचीत के बाद ही लिया जाएगा।

समझिए झारखंड विधानसभा का मौजूदा गणित

राज्य की 81 सदस्यीय विधानसभा में एक राज्यसभा सीट को जीतने के लिए न्यूनतम 28 वोटों (प्रथम वरीयता के मत) की आवश्यकता होगी। वर्तमान में सीटों का दलीय समीकरण इस प्रकार है:

  • महागठबंधन (कुल 56 विधायक): झामुमो-34, कांग्रेस-16, राजद-4, भाकपा माले-2।
  • एनडीए (कुल 24 विधायक): भाजपा-21, आजसू-1, जदयू-1, लोजपा (आर)-1।

कांग्रेस की दावेदारी और भाजपा का ‘बिहार मॉडल’ फॉर्मूला

समीकरणों के लिहाज से झामुमो अपने संख्या बल के दम पर पहली सीट सुरक्षित मान रहा है। लेकिन कांग्रेस अगर दूसरी सीट पर अपना दावा मजबूत करती है, तो उसे झामुमो के बचे हुए वोटों के साथ-साथ राजद और भाकपा माले के विधायकों के पूर्ण समर्थन की जरूरत होगी। गठबंधन के भीतर इस संतुलन को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

वहीं, एनडीए के पास फिलहाल 24 विधायक हैं और उसे अपनी सीट निकालने के लिए कम से कम 4 अतिरिक्त वोटों की दरकार है। भाजपा इसके लिए बिहार मॉडल की तर्ज पर रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी की नजर राजद के कुछ विधायकों और निर्दलीय या अन्य विधायकों के संभावित समर्थन पर टिकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव महज सीधा आंकड़ा नहीं है, बल्कि ऐन वक्त पर होने वाली क्रॉस वोटिंग ही अंतिम परिणाम तय करेगी। इस पूरे घटनाक्रम पर भारत मंथन लाइव न्यूज की नजर बनी हुई है।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *