जम्मू कश्मीर बोपी ने आतंकवाद पीड़ितों के लिए एमबीबीएस सीटें निकालीं

जम्मू और कश्मीर बोपी द्वारा आतंकवाद पीड़ितों के बच्चों के लिए एमबीबीएस सीटों की अधिसूचना

जम्मू और कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशंस (बोपी) ने शुक्रवार को श्रीनगर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आतंकवाद पीड़ितों के जीवनसाथी और बच्चों के लिए सेंट्रल पूल से आरक्षित एमबीबीएस सीटों को भरने के लिए ऑफलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं।

सेंट्रल पूल से कुल चार एमबीबीएस सीटें आवंटित

जम्मू और कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशंस (बोपी) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए सेंट्रल पूल से एमबीबीएस सीटों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जारी अधिसूचना के अनुसार, आतंकवाद के पीड़ितों के जीवनसाथी और बच्चों के लिए कुल चार सीटें आवंटित की गई हैं।

ये सीटें देश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें से एक सीट ए.एन. मगध मेडिकल कॉलेज, गया (बिहार), एक सीट ग्रांट मेडिकल कॉलेज, मुंबई (महाराष्ट्र), और दो सीटें निजी जे.एन.एम. मेडिकल कॉलेज, रायपुर (छत्तीसगढ़) में आरक्षित की गई हैं।

आवेदकों के लिए आवश्यक योग्यता और पात्रता मानदंड

बोपी के अनुसार, आवेदकों का जम्मू और कश्मीर का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। उम्मीदवार आतंकवाद के कारण मारे गए या विकलांग हुए नागरिक का जीवनसाथी या बच्चा होना चाहिए। इसके अलावा, प्रवेश के समय उम्मीदवार की आयु 17 वर्ष पूरी होनी चाहिए।

चयन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित नीट-यूजी 2026 परीक्षा में प्राप्त रैंक के आधार पर किया जाएगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि केवल आवेदन जमा करने से उम्मीदवारों को चयन का अधिकार नहीं मिलता है और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश की आरक्षण नीति लागू होगी।

प्राथमिकता और आवश्यक दस्तावेजों की सूची

सीटों के आवंटन में पहली प्राथमिकता उन बच्चों को दी जाएगी जिन्होंने आतंकवाद के कारण अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है। इसके बाद उन परिवारों के बच्चों को प्राथमिकता मिलेगी जिनके एकमात्र कमाने वाले सदस्य की आतंकवादियों ने हत्या कर दी, और फिर उन पीड़ितों के आश्रितों को जिन्होंने स्थायी विकलांगता या गंभीर चोट का सामना किया है।

आवेदन के लिए अधिवास प्रमाण पत्र (डोमिसाइल), नीट स्कोर कार्ड, 12वीं की अंकतालिका और जन्म तिथि प्रमाण पत्र आवश्यक हैं। इसके साथ ही आवेदकों को एफआईआर, मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एक हलफनामा जमा करना होगा। यह प्रमाण पत्र संबंधित एसएचओ और अस्पताल द्वारा जारी तथा संबंधित एसएसपी और तहसीलदार द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित होना चाहिए।

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