छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के विश्रामपुरी में एक सरकारी लैब टेक्नीशियन द्वारा अपने निजी क्लीनिक में इंजेक्शन लगाने के बाद 32 वर्षीय मिथिला नेताम की मौत हो गई। 18 अगस्त की सुबह तीन बच्चों की मां मिथिला अपने पति के साथ ब्लड टेस्ट कराने गई थी। विश्रामपुरी बीएमओ ने स्पष्ट किया है कि लैब टेक्नीशियन को इंजेक्शन लगाने का अधिकार नहीं है।
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के विश्रामपुरी से एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां 32 वर्षीय मिथिला नेताम की एक निजी क्लीनिक में इंजेक्शन लगने के बाद अचानक मौत हो गई। मृतका तीन बच्चों की मां थी और ग्राम पिटेचुआ कोटवारपारा की निवासी थी।
मृतका के पति सुनील कुमार नेताम के अनुसार, 18 अगस्त की सुबह तबीयत खराब होने पर वे ब्लड टेस्ट कराने के लिए विश्रामपुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ लैब टेक्नीशियन सहदेव वर्मा के घर स्थित निजी क्लीनिक गए थे।
मृतका के देवर विजय नेताम ने आरोप लगाया कि सहदेव वर्मा ने पहले मिथिला का ब्लड सैंपल लिया और उसके बाद उनके हाथ में एक इंजेक्शन लगा दिया। परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन लगने के तुरंत बाद मिथिला की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और वह देखते ही देखते बेहोश हो गई।
महिला की हालत गंभीर होते देख परिजन उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विश्रामपुरी लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि महिला को कौन सा इंजेक्शन दिया गया था, उसे किसने लिखा था या उसकी डोज क्या थी। इस घटना पर विश्रामपुरी के बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) ने स्पष्ट किया कि लैब टेक्नीशियन को मरीज को इंजेक्शन लगाने का कोई कानूनी या चिकित्सीय अधिकार नहीं है।
