महाराष्ट्र में गणेशोत्सव से ठीक पहले उत्सव के दौरान डीजे (DJ) संगीत बजाने को लेकर विवाद गहरा गया है। पुणे के नागरिक विद्यानंद बापट द्वारा शुरू किए गए विरोध के बाद राज्यभर में बहस छिड़ गई है। नागपुर, सोलापुर और छत्रपति संभाजीनगर पुलिस ने डीजे बजाने पर प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि अन्य शहरों में मांग तेज हो रही है।
पुणे से शुरू हुई डीजे विरोध की लहर पूरे राज्य में फैली
महाराष्ट्र में 14 सितंबर से शुरू हो रहे गणेशोत्सव से पहले डीजे संगीत के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज हो गई है। पुणे के नारायण पेठ निवासी विद्यानंद बापट ने पुणे नगर निगम की एक बैठक में डीजे संगीत का विरोध किया था। इसके कुछ दिनों बाद एक गणेश पूजा समिति के स्वयंसेवक द्वारा बापट पर हमला किए जाने का वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद यह मुद्दा पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बन गया।
6 सितंबर को पुणे के नागरिकों ने डीजे संगीत के खिलाफ एक बड़ा मार्च निकाला और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस विषय पर कड़ा रुख अपनाने का आग्रह किया।
नागपुर, सोलापुर और छत्रपति संभाजीनगर में लगा बैन
राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई अंतिम नीतिगत निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन नागपुर, सोलापुर और छत्रपति संभाजीनगर की पुलिस ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में डीजे संगीत के बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
दूसरी ओर, पुणे में स्थानीय प्रशासन और पुलिस के स्तर पर नागरिकों की प्रतिक्रियाओं और सार्वजनिक सुरक्षा को देखते हुए फैसले लिए जा रहे हैं।
डीजे विवाद पर सत्ताधारी गठबंधन में उभरे मतभेद
डीजे बैन को लेकर राज्य के नेताओं और मंत्रियों में भिन्न राय देखने को मिल रही है। गृह राज्य मंत्री (शहरी) योगेश रामदास कदम ने जहां पारंपरिक उत्साह का समर्थन किया, वहीं उनके कैबिनेट सहयोगी संजय शिरसाट और मेघना बोर्डीकर ने ध्वनि प्रदूषण एवं स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के आधार पर प्रतिबंध का समर्थन किया है।
शिवसेना मंत्री गुलाबराव पाटिल ने भी अपने निजी अनुभव का हवाला देते हुए डीजे संगीत पर रोक लगाने की वकालत की है। इसके अतिरिक्त, भाजपा राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने भी विद्यानंद बापट का समर्थन करते हुए त्योहारों को शांतिपूर्ण और पारंपरिक तरीके से मनाने पर जोर दिया है।
भारत मंथन लाइव न्यूज की विशेष रिपोर्ट
भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, गणेश मंडलों के स्वयंसेवकों और आम नागरिकों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती प्रशासन के सामने खड़ी है। 14 सितंबर से शुरू हो रहे उत्सव को देखते हुए राज्य के अन्य जिलों में भी ध्वनि मानकों को सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
