राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 की कला शिक्षा पाठ्यपुस्तक में सिंधु घाटी सभ्यता की प्रसिद्ध ‘डांसिंग गर्ल’ (नर्तकी) के धुंधले और ढके हुए चित्र को हटाकर उसके मूल रूप को शामिल करने का निर्णय लिया है। शिक्षाविदों द्वारा इस चित्र में बदलाव की आलोचना किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है।
विवाद के बाद एनसीईआरटी का बड़ा फैसला
कक्षा 9 की एक पाठ्यपुस्तक में सिंधु घाटी सभ्यता की प्रतिष्ठित ‘डांसिंग गर्ल’ (नर्तकी की मूर्ति) के धुंधले और ढके हुए चित्रण पर विवाद और आलोचना के बाद, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कला शिक्षा की अपनी पाठ्यपुस्तक में इस चित्र को हटाकर इसके मूल संस्करण को शामिल करने का निर्णय लिया है।
एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश सकलानी ने कहा कि जैसे ही यह मामला संगठन के संज्ञान में आया, इसे तुरंत गंभीरता से लिया गया और संबंधित विभाग को मामले की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विशेषज्ञों के साथ परामर्श के बाद अब इस चित्र को इसके वास्तविक और मूल रूप से बदला जा रहा है।
डिजिटल और प्रिंटेड किताबों में होगा तत्काल सुधार
दिनेश सकलानी के अनुसार, पाठ्यपुस्तक के डिजिटल संस्करण (ई-बुक) में इस सुधार को तुरंत लागू किया जा रहा है, जबकि भविष्य में आने वाले संशोधित प्रिंट संस्करणों में भी ‘डांसिंग गर्ल’ का मूल चित्र ही छापा जाएगा। यह स्पष्टीकरण तब आया जब नई शुरू की गई पाठ्यपुस्तक में सिंधु घाटी सभ्यता की इस प्रसिद्ध कलाकृति के परिवर्तित और ढके हुए रूप को लेकर शिक्षाविदों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। कुछ शिक्षाविदों ने इस बदलाव को सेंसरशिप का एक प्रयास करार दिया था।
पाठ्यपुस्तक में यह मूर्ति अपने मूल रूप की तुलना में अधिक गहरे रंग (शेड) में दिखाई दे रही थी और इसके धड़ (torso) के कुछ हिस्सों को ढका गया था। प्रसिद्ध सिंधु घाटी सभ्यता की यह कलाकृति कला इतिहास में सबसे अनूठी मानी जाती है, जिसे इस तरह प्रस्तुत किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया था।
कला शिक्षा श्रृंखला के तहत जारी हुई थी पुस्तक
Bharat Manthan Live News के अनुसार, यह विवादित चित्र एनसीईआरटी द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के तहत कक्षा 1 से 10 तक के लिए पहली बार शुरू की गई कला शिक्षा श्रृंखला की पुस्तक का हिस्सा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कला शिक्षा को मुख्यधारा की स्कूली शिक्षा में एकीकृत करना है, जिसके तहत अब तक कक्षा 1 से 9 तक की पुस्तकें जारी की जा चुकी हैं।
मोहनजो-दड़ो से खोजी गई यह मूल कांस्य (bronze) मूर्ति लगभग 10.5 सेंटीमीटर ऊंची है और अपने स्वाभाविक यथार्थवादी चित्रण के लिए जानी जाती है। इस ऐतिहासिक मूर्ति में नर्तकी की आकृति को एक हाथ में कई चूड़ियों और गले में एक हार पहने हुए दर्शाया गया है।
