रांची स्थित रिम्स परिसर में दिसंबर 2025 को हुए अतिक्रमण विवाद मामले में आरोपी निशा कुमारी भगत को झारखंड हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने बुधवार को उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली, जबकि सरकारी कार्य में बाधा और मारपीट के आरोपों की जांच अभी जारी रहेगी।
झारखंड हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर दी अग्रिम जमानत
रांची: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) परिसर में अतिक्रमण हटाने के दौरान हुए विवाद से जुड़े एक मामले में आरोपी निशा कुमारी भगत को झारखंड हाई कोर्ट से राहत मिली है। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की अग्रिम जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है।
यह पूरा मामला रांची सदर थाना कांड संख्या 608/2025 के तहत दर्ज है। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, पुलिस बल के साथ मारपीट करने और अन्य गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
निचली अदालत से झटका लगने के बाद पहुंचे थे हाई कोर्ट
उल्लेखनीय है कि इस मामले में राहत के लिए निशा कुमारी भगत ने पहले निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, निचली अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने निचली अदालत के फैसले को झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां से उन्हें अब राहत मिल गई है।
महिला पुलिसकर्मी के घायल होने का है आरोप
यह विवाद पिछले साल 17 दिसंबर 2025 को उस समय हुआ था जब प्रशासन की टीम रिम्स परिसर के भीतर से अतिक्रमण हटाने का अभियान चला रही थी। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, इस प्रशासनिक कार्रवाई का कुछ स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध किया था, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई।
पुलिस के अनुसार, इस हंगामे के कारण न केवल सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न हुई, बल्कि प्रदर्शन के दौरान एक महिला पुलिसकर्मी भी घायल हो गई थीं। भारत मंथन लाइव न्यूज को मिली जानकारी के मुताबिक, इस झड़प के बाद ही निशा कुमारी भगत समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया गया था। अदालत ने भले ही एक आरोपी को जमानत दे दी है, लेकिन मामले की पुलिस जांच और अन्य आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया लगातार जारी है।
