काठमांडू में 17 अप्रैल 2026 को नेपाल सरकार ने मधेश प्रांत में अवैध रूप से चल रहे भारतीय नंबर वाले वाहनों पर कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, बिना कस्टम प्रक्रिया पूरी किए या तय समय सीमा से अधिक चलने वाले वाहनों के खिलाफ यह अभियान चलाया जा रहा है।
मधेश में भारतीय वाहनों पर नेपाल की कार्रवाई
नेपाल के मधेश प्रांत में भारतीय पंजीकरण वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की गई है। यह अभियान उन वाहनों के खिलाफ चलाया जा रहा है जो बिना कस्टम प्रक्रिया पूरी किए या निर्धारित समय सीमा से अधिक समय तक संचालित हो रहे हैं।
गृह मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट
नेपाल के गृह मंत्रालय ने मधेश प्रांत के विभिन्न जिलों में चल रहे भारतीय वाहनों का डेटा मांगा है। यह क्षेत्र बिहार से सटा हुआ है, जहां बड़ी संख्या में ऐसे वाहन संचालित हो रहे हैं।
जनकपुर जिले के पुलिस प्रवक्ता कमल थापा ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और यह सुरक्षा के दृष्टिकोण से जरूरी है।
कस्टम नियमों का पालन अनिवार्य
मुख्य कस्टम अधिकारी विकास राज राजक ने बताया कि सीमा पार बाजारों में आने वाले भारतीय वाहनों को एक दिन का मुफ्त पास दिया जाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वाहनों को प्रवेश बिंदु पर आवश्यक कस्टम शुल्क जमा करने के बाद ही अनुमति दी जाती है और बिना शुल्क चुकाए वाहन चलाना नियमों के खिलाफ है।
हजारों अवैध वाहनों का अनुमान
अधिकारियों के अनुसार, मधेश प्रांत में हजारों भारतीय नंबर वाले वाहन अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। हाल के समय में इनकी संख्या में वृद्धि और नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं।
राजनीतिक दलों ने जताई आपत्ति
12 अप्रैल को सत्तारूढ़ राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RSP) सहित कई राजनीतिक दलों ने संयुक्त बयान जारी कर इन प्रतिबंधों का विरोध किया था।
राजनीतिक दलों ने चुनाव के दौरान भारतीय वाहनों के उपयोग का हवाला देते हुए पहले की तरह 30 किलोमीटर सीमा क्षेत्र में बिना रोक-टोक आवागमन की व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सख्ती बढ़ने पर विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं।
सस्ते होने के कारण बढ़ा उपयोग
रिपोर्ट के अनुसार, सीमा पार वाहन अपेक्षाकृत सस्ते होने के कारण मधेश के कई निवासी इन्हें भारतीय परिचितों या रिश्तेदारों के नाम पर खरीदते हैं, लेकिन पंजीकरण भारतीय ही रखते हैं।
संबंधों पर असर की आशंका
पूर्व प्रांतीय मंत्री योगेंद्र यादव ने कहा कि ऐसे कदम नेपाल और भारत के बीच खुले सीमा से बने सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के उपाय दोनों देशों के रिश्तों पर असर डाल सकते हैं।
