नई दिल्ली: पेंशन सेक्टर में FDI सीमा 100% तक बढ़ाने पर सरकार विचार में

नई दिल्ली में पेंशन सेक्टर में FDI सीमा बढ़ाने पर सरकार के संभावित फैसले से जुड़ी रिपोर्ट

नई दिल्ली में 19 अप्रैल 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार, सरकार पेंशन सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को मौजूदा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत तक करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में एक विधेयक आगामी मानसून या शीतकालीन सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है।

पेंशन सेक्टर में FDI सीमा बढ़ाने की तैयारी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार पेंशन क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की सीमा को 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत तक करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में एक विधेयक अगले संसद सत्र में लाया जा सकता है।

यह कदम बीमा क्षेत्र की नीति के अनुरूप माना जा रहा है, जहां पहले से ही 100 प्रतिशत FDI की अनुमति दी जा चुकी है।

बीमा क्षेत्र में पहले ही लागू 100% FDI

बीमा क्षेत्र में पिछले वर्ष संसद ने FDI सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी थी। इससे पहले 2015 में बीमा अधिनियम, 1938 में संशोधन कर सीमा 49 प्रतिशत से 74 प्रतिशत की गई थी।

अब सरकार इसी मॉडल को पेंशन क्षेत्र में भी लागू करने पर विचार कर रही है।

पेंशन क्षेत्र में संभावित संशोधन

सूत्रों के अनुसार, यह बदलाव पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) अधिनियम, 2013 में संशोधन के जरिए किया जा सकता है।

प्रस्तावित विधेयक को मानसून सत्र या शीतकालीन सत्र में लाने की संभावना है, जो आवश्यक मंजूरियों पर निर्भर करेगा।

NPS ट्रस्ट में बदलाव की संभावना

इस प्रस्ताव में नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) ट्रस्ट को PFRDA से अलग करने का प्रावधान भी शामिल हो सकता है।

NPS ट्रस्ट के कार्यों को या तो एक चैरिटेबल ट्रस्ट या कंपनियों के अधिनियम के तहत लाने पर विचार किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इसके लिए 15 सदस्यीय बोर्ड बनाया जा सकता है, जिसमें सरकार और राज्यों के प्रतिनिधियों की प्रमुख भूमिका होगी, क्योंकि वे पेंशन फंड में बड़े योगदानकर्ता हैं।

NPS और पेंशन प्रणाली की पृष्ठभूमि

पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) का गठन पेंशन क्षेत्र के नियमन और विकास के लिए किया गया था।

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) को भारत सरकार ने पुरानी परिभाषित लाभ पेंशन प्रणाली की जगह शुरू किया था।

1 जनवरी 2004 से इसे केंद्र सरकार के नए कर्मचारियों के लिए लागू किया गया, जबकि 1 मई 2009 से इसे सभी नागरिकों के लिए स्वैच्छिक रूप से उपलब्ध कराया गया।

सरकार ने यह बदलाव बढ़ते पेंशन खर्च को नियंत्रित करने और विकास कार्यों के लिए संसाधनों को अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने के उद्देश्य से किया था।

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