पीएम मोदी मन की बात: 134वें एपिसोड में समाज सेवा, जल संरक्षण और रांची खेल रिकॉर्ड की चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' के 134वें एपिसोड के दौरान देश को संबोधित करते हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 31 मई 2026 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड के जरिए देश को संबोधित किया। प्रधानमंत्री का यह संबोधन मुख्य रूप से सामुदायिक समाज सेवा, जल संरक्षण पहलों, खेल उपलब्धियों, गर्मी से बचाव के उपायों और भारत की समृद्ध कृषि व सांस्कृतिक विविधता पर केंद्रित रहा।

मासिक रेडियो संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सामाजिक कार्यों में जनभागीदारी का आह्वान किया

अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय और स्थानीय महत्व के कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे सामुदायिक कल्याण परियोजनाओं में अपनी भागीदारी को अधिकतम बढ़ाएं और देश भर में सकारात्मक बदलाव लाने वाले व्यक्तियों से सक्रिय रूप से प्रेरणा लें। उन्होंने रेखांकित किया कि अनुकरणीय कार्य करने वाले लोगों की पहचान करना, उनकी सराहना करना और उनसे सीखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक नागरिक को किसी न किसी सामाजिक कार्य का हिस्सा बनने का प्रयास करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने भारत में आम की विविधता और किसानों के योगदान को सराहा

वर्तमान गर्मी के मौसम का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में उपजाए जाने वाले आमों की विशाल विविधता पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्थानीय किसानों के योगदान की विशेष रूप से सराहना की और महाराष्ट्र व कोंकण के हापुस (अल्फांसो), गुजरात के केसर, उत्तर प्रदेश के दशहरी और काशी के लंगड़ा आम जैसी विशिष्ट किस्मों का जिक्र किया।

भीषण गर्मी से बचाव के लिए प्रधानमंत्री ने नागरिकों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, धूप में बाहर निकलते समय सतर्क रहने और सरकारी स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करने की सलाह दी। उन्होंने कई पारंपरिक क्षेत्रीय पेयों का भी उल्लेख किया जो गर्मी से राहत प्रदान करते हैं और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना के तहत देश के सांस्कृतिक ताने-बाने को प्रदर्शित करते हैं। इन पेयों में उत्तर भारत का आम पन्ना, पंजाब और हरियाणा की लस्सी, राजस्थान और गुजरात की छाछ, बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का सत्तू शरबत, कोंकण और गोवा का कोकम शरबत व सोलकढ़ी के साथ-साथ दक्षिण भारत का पनकम, नीर मोर और सांबरम शामिल हैं।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *