साहिबगंज से सऊदी तक गूंजा वर्चुअल काव्य गोष्ठी ‘वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ पोएट्स’ का तराना

साहिबगंज और सऊदी अरब समेत 10 देशों के कवियों ने अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल काव्य गोष्ठी में लिया हिस्सा।

लखनऊ के साहित्यकार डॉ. मनोज अग्रवाल के मंच ‘वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ पोएट्स’ पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल काव्य गोष्ठी में साहिबगंज और सऊदी अरब सहित 10 देशों के रचनाकारों ने हिस्सा लिया। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, साहिबगंज के प्रो. सुबोध कुमार झा ‘आशु’ के ओजस्वी संचालन और ग़ज़ल प्रस्तुति ने इस आभासी पटल को वैश्विक स्तर पर जीवंत बना दिया।

‘वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ पोएट्स’ के अंतरराष्ट्रीय डिजिटल मंच पर एकजुट हुए 10 देशों के साहित्यकार

साहिबगंज: लखनऊ के प्रख्यात चिकित्सक और साहित्यकार डॉ. मनोज अग्रवाल ‘गुमनाम लखनवी’ के साहित्यिक मंच ‘वंडरफुल वर्ल्ड ऑफ पोएट्स’ के तत्वावधान में एक अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस डिजिटल गोष्ठी में विश्व के करीब 10 देशों के प्रमुख कवियों और श्रोताओं ने एक साथ हिस्सा लिया।

इस आभासी पटल के माध्यम से सात समंदर पार बैठे साहित्य प्रेमियों तक लखनवी तहज़ीब और काव्य की गूंज पहुंची। कार्यक्रम को तकनीकी और डिजिटल रूप से वैश्विक स्तर पर लाइव प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई।

सऊदी अरब से लेकर झांसी तक सजी तकनीकी महफिल

इस अंतरराष्ट्रीय गोष्ठी को डिजिटल पटल पर साकार करने के लिए सऊदी अरब से अनीस अहमद भाई और झांसी से पंकज कुमार खरे ‘लेश’ ने संयुक्त रूप से कमान संभाली। इन दोनों के समन्वय से तैयार किए गए इस डिजिटल मंच के माध्यम से कार्यक्रम का प्रसारण दुनिया के 10 अलग-अलग देशों में लाइव देखा और सुना गया।

चिकित्सा और साहित्य के इस अनोखे संगम को वैश्विक श्रोताओं द्वारा काफी सराहा गया। कार्यक्रम की शुरुआत लखनऊ की डॉ. किरण दयाल ‘स्नेही’ द्वारा प्रस्तुत मां सरस्वती वंदना से हुई, जिन्होंने अपनी ग़ज़लों से भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

साहिबगंज के प्रो. सुबोध कुमार झा ‘आशु’ ने संभाली संचालन की बागडोर

“मुक्तक छंद से बात शुरू कर जब उन्होंने मधुर कंठ से ग़ज़ल छेड़ी, तो लगा जैसे शमा खुद-ब-खुद रौशन हो गई।” — कार्यक्रम समीक्षा

झांसी के कुशल संचालक पंकज खरे ‘लेश’ के आमंत्रण पर साहिबगंज के प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. सुबोध कुमार झा ‘आशु’ ने महफिल के संचालन की जिम्मेदारी संभाली। माइक संभालते ही प्रो. सुबोध कुमार झा ने अपनी ओजस्वी वाणी, जोशीली प्रस्तुति और सहज-सरल संचालन शैली से पूरे माहौल को प्रभावित किया।

उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत मुक्तक छंद से की और फिर अपनी सुरीली आवाज में ग़ज़ल की प्रस्तुति दी। इसके अलावा, पंकज खरे ‘लेश’ ने भी सभी आमंत्रित अतिथियों का परिचय कराने के साथ-साथ अपनी गायकी से महफिल में जमकर सराहना और तालियां बटोरीं।

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