झारखंड की राजधानी रांची की यातायात व्यवस्था को सुगम और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जल्द ही छोटी इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन शुरू किया जाएगा। सड़कों की चौड़ाई और टर्निंग प्वाइंट को ध्यान में रखते हुए रांची नगर निगम और नगर विकास विभाग ने मंथन कर यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है।
रांची की सड़कों पर दौड़ेंगी छोटी ई-बसें: नगर निगम और नगर विकास विभाग की बड़ी योजना
रांची: झारखंड की राजधानी रांची की यातायात व्यवस्था को सुगम, आधुनिक और पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। शहर की सड़कों की चौड़ाई और प्रमुख मोड़ों (टर्निंग प्वाइंट) को ध्यान में रखते हुए रांची में जल्द ही छोटी इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन शुरू करने की तैयारी की जा रही है। भारत मंथन Live News को मिली जानकारी के अनुसार, नगर निगम और नगर विकास विभाग ने उच्च स्तरीय मंथन के बाद यह संयुक्त फैसला लिया है।
इस नई योजना से न केवल शहर की सड़कों पर आए दिन लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि पर्यावरण को भी बड़ा लाभ होगा। इन बसों के बेड़े में शामिल होने से स्थानीय जनता को एक सस्ता, आरामदायक और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन का बेहतर विकल्प मिल सकेगा।
सड़कों की स्थिति के अनुसार लिया गया निर्णय: जाम और प्रदूषण से मिलेगी राहत
संकरे रास्तों के लिए उपयुक्त
रांची के नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि राजधानी की कई मुख्य और कनेक्टिंग सड़कों पर वर्तमान में चल रही बड़ी बसों के मुड़ने और चलने के कारण अक्सर ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इस व्यावहारिक समस्या को दूर करने के लिए छोटी इलेक्ट्रिक बसों को चुनने का फैसला किया गया है, जो आकार में छोटी होने के कारण संकरे रास्तों और तंग मोड़ों पर भी बेहद आसानी से आ-जा सकेंगी।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर
नगर आयुक्त के मुताबिक, इन नई ई-बसों के सड़कों पर उतरने से शहर में ध्वनि और वायु प्रदूषण में भारी कमी दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही, सार्वजनिक परिवहन (पब्लिक ट्रांसपोर्ट) का उपयोग करने वाले आम यात्रियों को बेहद किफायती दरों पर आरामदायक यात्रा की सुविधा उपलब्ध होगी।
वर्तमान में 2 दर्जन बसों के भरोसे जनता: रूट और चार्जिंग पर काम शुरू
वर्तमान स्थिति और नगर निगम का बेड़ा
रांची शहर की मौजूदा बढ़ती आबादी के लिहाज से यहाँ का सार्वजनिक परिवहन ढांचा काफी सीमित है। वर्तमान में रांची नगर निगम केवल 2 दर्जन डीजल बसों का संचालन कर रहा है, जो शहर की विशाल आबादी के लिए पूरी तरह नाकाफी साबित हो रही हैं।
