मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में पिछले 15 दिन से कुपी गांव के पास बराना नदी किनारे अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों को पुलिस तथा प्रशासन ने बरसाती मौसम और बढ़ते जलस्तर के खतरे का हवाला देते हुए रविवार सुबह प्रदर्शन स्थल से जबरन हटा दिया।
प्रशासन ने जलस्तर का हवाला देकर प्रदर्शनकारियों को हटाया
मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। रविवार सुबह स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल ने कार्रवाई करते हुए आंदोलनकारियों को प्रदर्शन स्थल से हटा दिया। अधिकारियों ने इस कार्रवाई के पीछे बरसाती मौसम और नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण सुरक्षा खतरों का हवाला दिया है। भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, प्रदर्शनकारी विस्थापित परिवारों के पुनर्वास से संबंधित वादे पूरे नहीं होने के विरोध में 3 जुलाई से कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे।
नेतृत्वकर्ता का आरोप: बर्बर तरीके से कुचला गया शांतिपूर्ण आंदोलन
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने प्रशासनिक कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने इस शांतिपूर्ण आंदोलन को बर्बर तरीके से कुचलने का प्रयास किया है, लेकिन उनका आमरण अनशन और आंदोलन जारी रहेगा। भटनागर ने कहा कि पुलिस ने सुबह की कार्रवाई के दौरान महिलाओं के साथ मारपीट की और सांकेतिक चिताओं व फांसी के स्थान को तोड़ दिया। उन्होंने संकल्प जताते हुए कहा कि अब चाहे उनकी जान चली जाए, वे अनशन नहीं तोड़ेंगे और सिर्फ पानी तथा नींबू पानी पिएंगे।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और प्रशासनिक दावा
इस घटनाक्रम पर राज्य के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आंदोलनकारियों को प्रदर्शन स्थल से जबरन हटाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने असहमति की हर आवाज़ को कुचलना अपने शासन का मॉडल बना लिया है।
दूसरी ओर, प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किए जाने के आरोपों से साफ इनकार किया है। प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए सभी प्रदर्शनकारियों को प्रेम व शांतिपूर्ण तरीके से उनके घरों तक पहुंचा दिया गया है।
