गिरिडीह जिले के बेंगाबाद थाना क्षेत्र के भंवरडीह गांव में रविवार 17 मई 2026 को उस समय एक भावुक माहौल बन गया, जब हत्या के मामले में जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी अपनी मृत मां के बारहवीं श्राद्ध कर्म में शामिल होने के लिए कोर्ट से पैरोल मिलने पर कड़ी सुरक्षा के बीच अपने गांव पहुंचा।
कोर्ट से पैरोल मिलने पर कड़ी सुरक्षा के बीच गांव लाया गया बंदी
गिरिडीह: जिले के बेंगाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत भंवरडीह गांव में रविवार को एक बेहद गमगीन और भावुक कर देने वाला दृश्य देखा गया। हत्या के एक मामले में गिरिडीह मंडल कारा (जेल) में बंद एक विचाराधीन कैदी को उसकी मां के बारहवीं के श्राद्ध कर्म में शामिल होने के लिए न्यायालय द्वारा पैरोल दी गई थी। इसके बाद पुलिस अभिरक्षा में कैदी वाहन के जरिए उसे उसके पैतृक गांव भंवरडीह लाया गया।
भारत मंथन लाइव न्यूज के अनुसार, जब भारी संख्या में पुलिस बल के साथ हथकड़ी लगा कैदी पुत्र गांव पहुंचा, तो उसे देखने के लिए स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। अचानक बड़ी संख्या में पुलिस बल के आगमन से कुछ देर के लिए गांव में अफरा-तफरी की स्थिति जरूर बनी, लेकिन मामले की पूरी सच्चाई जानने के बाद माहौल सामान्य हो गया।
एक वर्ष के भीतर एक ही परिवार में दो मौतों से स्तब्ध है इलाका
संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी बहू की मौत
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि एक वर्ष पुरानी है। जानकारी के अनुसार, भंवरडीह निवासी खगेंद्र वर्मा की पत्नी की 6 मई 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस संदर्भ में बेंगाबाद थाने में कांड संख्या 67/2025 दर्ज किया गया था। इस मामले में मृतका के पति यानी खगेंद्र वर्मा के पुत्र पर हत्या का आरोप लगा था, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपी पुत्र तब से ही लगातार कारावास की सजा काट रहा है।
पुत्र के वियोग में वृद्ध मां ने की आत्महत्या
इस घटना के लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद, बीती 5 मई 2026 को जेल में बंद युवक की 72 वर्षीय वृद्ध मां ने भी अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुत्र के जेल में बंद होने के कारण वह अपनी मां के अंतिम संस्कार और मुखाग्नि के समय उपस्थित नहीं हो सका था। इसके बाद परिजनों द्वारा कानूनी प्रयास किए गए और न्यायालय से पैरोल मिलने के बाद उसे अब श्राद्ध कर्म की रस्मों में शामिल होने की अनुमति प्रदान की गई।
हथकड़ी लगाए कैदी पुत्र ने तालाब घाट पर पूरी की विधि-विधान
घर पहुंचने के बाद बंदी पुत्र ने सबसे पहले अपने दुखी परिजनों और रिश्तेदारों से मुलाकात की। इसके बाद, तैनात पुलिस सुरक्षा घेरे के बीच उसे गांव के ही एक स्थानीय तालाब घाट पर ले जाया गया। वहां उसने स्नान करने के पश्चात अपने हाथों में हथकड़ी लगे होने की स्थिति में ही पूरे विधि-विधान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अपनी मृत मां के श्राद्ध कर्म की रस्मों को संपन्न किया। एक ही परिवार में एक साल के भीतर सास और बहू की असमय मौत की इस दुखद घटना से पूरे भंवरडीह क्षेत्र में गहरा शोक और स्तब्धता पसरी हुई है।
