गुमला में जंगली सूअर के शिकार के लिए बिजली का तार
गुमला जिले के पूसो थाना क्षेत्र के हेसागुटु और कल्हुटोली गांव में खेतों के आसपास नंगा बिजली का तार बिछाकर उसमें करंट प्रवाहित किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों के मुताबिक, कथित तौर पर जंगली सूअर के शिकार के लिए इस तरह की व्यवस्था की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि खेतों के किनारे करंट प्रवाहित तार लगे होने से वहां से गुजरने वाले लोगों और मवेशियों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।
खेतों की मेड़ और आसपास लगाए गए तार
गांव के ओमप्रकाश महतो के अनुसार, एतवा उरांव, सुरेंद्र गोप, सुक्रू समेत 10 से अधिक लोगों द्वारा मकई के खेतों की मेड़ और आसपास खंभे गाड़कर नंगे बिजली के तार लगाए गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि इन तारों में करंट प्रवाहित कर जंगली सूअर का शिकार करने का प्रयास किया जाता है। उनका कहना है कि खेतों के आसपास करंट प्रवाहित तारों के कारण कई बार ग्रामीणों को हल्का बिजली का झटका भी लग चुका है।
रात में बढ़ जाता है हादसे का खतरा
ग्रामीणों के मुताबिक, तार खेतों के किनारे-किनारे लगाए गए हैं और रात के समय इनके संपर्क में आने का खतरा अधिक रहता है। इसी वजह से कुछ ग्रामीणों ने क्षेत्र में घास काटने और आने-जाने से भी दूरी बना ली है।
ग्रामीणों को आशंका है कि अंधेरे में कोई व्यक्ति या मवेशी अनजाने में तार के संपर्क में आया तो गंभीर हादसा हो सकता है।
तार लगाने वालों ने बताया फसल की सुरक्षा का कारण
जब तार लगाने वाले ग्रामीणों से इस संबंध में पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि खेत में बिजली का तार फसल की सुरक्षा के लिए लगाया गया है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि फसल की सुरक्षा के लिए भी तार लगाए गए हों, लेकिन उसमें करंट प्रवाहित करना लोगों और मवेशियों के लिए खतरा पैदा करता है।
बताया जा रहा है कि खेतों में यह तार करीब एक महीने से अधिक समय से जुड़ा हुआ है। समाचार लिखे जाने तक बिजली विभाग की ओर से कार्रवाई किए जाने की सूचना नहीं थी।
ग्रामीणों ने विभागों से जांच की मांग की
ग्रामीणों ने संबंधित विभागों से मौके पर जांच कर नंगे तार को तत्काल हटाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
जंगली जानवरों के शिकार के लिए बिजली के इस्तेमाल की आशंका को लेकर ग्रामीणों ने वन विभाग से भी हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि करंट का इस्तेमाल किसी इंसान या मवेशी की जान के लिए भी खतरा बन सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन, बिजली विभाग और वन विभाग से मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले खतरे को टाला जा सके।
