गुमला सदर अस्पताल से रेफर नवजात निजी अस्पताल पहुंचे, ₹26,800 जमा कराने का आरोप

गुमला सदर अस्पताल से रेफर नवजात निजी अस्पताल पहुंचे, ₹26,800 जमा कराने का आरोप

गुमला में रेफर किए गए नवजातों को निजी अस्पताल ले जाने का आरोप

गुमला सदर अस्पताल से रिम्स रांची रेफर किए गए दो नवजात बच्चों को कथित तौर पर नारायणी अस्पताल ले जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में बच्चों के मामा कुश प्रधान ने सिविल सर्जन को आवेदन देकर डॉक्टर और दोनों वाहन चालकों पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।

आवेदन के अनुसार, तेलगांव कोनाटोली निवासी कुश प्रधान की बहन महेश्री कुमारी ने दो बच्चों को जन्म दिया था। इसके बाद बच्चों की स्थिति ठीक नहीं होने की बात कहकर सदर अस्पताल के डॉक्टर दीपक ने उन्हें रिम्स रांची रेफर किया था।

रिम्स के बजाय नारायणी अस्पताल पहुंचाने का आरोप

परिजनों के मुताबिक, दोनों नवजातों को अलग-अलग वाहनों से रांची ले जाया गया। इन वाहनों को दिलीप और रामू नायक चला रहे थे। कुश प्रधान का आरोप है कि रेफर पेपर में रिम्स रांची का उल्लेख होने के बावजूद दोनों चालक बच्चों को नारायणी अस्पताल ले गए।

परिजनों के अनुसार, जब उन्होंने इस बारे में वाहन चालकों से सवाल किया, तो उन्होंने बताया कि डॉक्टर दीपक ने उन्हें इसी अस्पताल में ले जाने के लिए कहा था। परिजनों का यह भी कहना है कि उन्हें बताया गया था कि वहां बच्चों के इलाज के लिए कोई पैसा नहीं लगेगा।

अस्पताल में 26,800 रुपये जमा कराने का आरोप

कुश प्रधान के अनुसार, नारायणी अस्पताल पहुंचने के बाद उनसे 26,800 रुपये जमा कराए गए। इसके बाद अस्पताल की ओर से 13 हजार रुपये और मांगे जाने की बात कही गई है।

परिजनों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और वे अतिरिक्त राशि देने में असमर्थ हैं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है।

सिविल सर्जन से जांच और कार्रवाई की मांग

कुश प्रधान ने सिविल सर्जन को दिए आवेदन में मांग की है कि रेफर पेपर में रिम्स रांची लिखे होने के बावजूद नवजातों को निजी अस्पताल पहुंचाने के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

उन्होंने डॉक्टर और वाहन चालकों पर परिजनों को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। अब मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में संबंधित डॉक्टर, वाहन चालकों और निजी अस्पताल का पक्ष शामिल नहीं है।

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