माली में गहराते सुरक्षा संकट के बीच रक्षा मंत्री सादियो कमारा की एक कार बम हमले में मौत हो गई है। यह हमला तब हुआ जब देश में सेना और तुआरेग अलगाववादियों व जिहादी समूहों के बीच भीषण संघर्ष चल रहा है। राजधानी बमाको और काती में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, जबकि सैन्य सरकार के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
माली में बड़ा हमला: रक्षा मंत्री सादियो कमारा की हत्या
माली की राजधानी बमाको और जुंटा (सैन्य सरकार) के गढ़ काती में सुरक्षा स्थिति नाजुक बनी हुई है। शनिवार को हुए एक कार बम हमले में रक्षा मंत्री सादियो कमारा की मृत्यु हो गई। यह हमला उस समय हुआ जब माली सेना और तुआरेग अलगाववादियों व अल-कायदा समर्थित जिहादी समूह (JNIM) के बीच दो दिनों तक भीषण संघर्ष चला।
2020 में तख्तापलट के बाद से यह सैन्य सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। विशेष रूप से, सैन्य शासक जनरल असिमी गोइता के बारे में हमले के बाद से कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं मिली है।
अलगाववादियों का दावा: किदाल पर नियंत्रण
इस संघर्ष के बीच, अजावद लिबरेशन फ्रंट (FLA) के विद्रोहियों ने उत्तरी माली के प्रमुख शहर ‘किदाल’ पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया है। विद्रोहियों का यह भी कहना है कि उन्होंने रूसी वैगनर ग्रुप (अफ्रीका कोर) के भाड़े के सैनिकों को किदाल से सुरक्षित निकलने के लिए एक समझौते पर सहमति जताई है। नवंबर 2023 में माली सेना ने इन रूसियों की मदद से किदाल को वापस हासिल किया था।
राजधानी में सुरक्षा और तनाव
सोमवार को बमाको और काती में कुछ हद तक शांति देखी गई, हालांकि सड़कों पर भारी हथियारों से लैस सैनिकों की तैनाती बनी हुई है। 47 वर्षीय रक्षा मंत्री सादियो कमारा के घर पर हुए इस आत्मघाती हमले में उनकी दूसरी पत्नी और दो पोते-पोतियों की भी जान गई है। सरकार के अनुसार, कमारा ने हमलावरों का सामना किया था, लेकिन बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
देश ‘खतरे’ में: विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय समुदाय
माली के विपक्षी गठबंधन ‘कोएलिशन ऑफ फोर्सेस फॉर द रिपब्लिक’ (CFR) ने बयान दिया है कि देश “खतरे” में है। विपक्षी गुट का कहना है कि जुंटा ने सुरक्षा और स्थिरता का जो वादा किया था, वह विफल रहा है।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने हिंसा की निंदा की है और साहेल क्षेत्र में आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया है। माली की सैन्य सरकार ने इन हमलों को साहेल की मुक्ति के दुश्मनों द्वारा रचा गया “एक राक्षसी साजिश” करार दिया है।
