रायपुर में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने माना, राज्य में मलेरिया से तीन मौतें

रायपुर में प्रेस वार्ता कर विभागीय आंकड़े प्रस्तुत करते स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

रायपुर में प्रेस वार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राज्य में मलेरिया से तीन लोगों की मौत होने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि सरकार प्रयास कर रही है कि बीमारी से एक भी मौत न हो। मंत्री ने बताया कि बस्तर में मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत रह गई है।

रायपुर में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की प्रेस वार्ता

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। इस दौरान उन्होंने राज्य में मलेरिया की स्थिति और स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकताओं पर अपनी बात रखी।

तीन मौतों की बात स्वीकार, शून्य मौत का लक्ष्य

स्वास्थ्य मंत्री ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए माना कि हाल ही में राज्य में तीन लोगों की मलेरिया से मौत हुई है। उन्होंने कहा कि इसे छिपाया नहीं जा सकता, लेकिन सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है कि मलेरिया से एक भी मरीज की जान न जाए।

बस्तर में मलेरिया पॉजिटिविटी दर में भारी गिरावट

मंत्री जायसवाल ने बताया कि रणनीतिक कार्ययोजना, घर-घर सर्वेक्षण, त्वरित जाँच और इलाज के माध्यम से बड़ी सफलता मिली है। बस्तर संभाग में मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत पर आ गई है। इसके अलावा राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) भी 5.21 से घटकर 0.90 रह गया है।

16.97 लाख मच्छरदानियों का वितरण और राष्ट्रीय सम्मान

उन्होंने जानकारी दी कि उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में 16.97 लाख कीटनाशकयुक्त मच्छरदानियों का वितरण किया गया है। वर्ष 2015 की तुलना में 2025 तक मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जिसके लिए भारत सरकार द्वारा इसे राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में सम्मानित किया गया।

बस्तर अभियान और डॉक्टरों की भर्ती

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के तहत 34 लाख से अधिक लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गईं। इसमें 60 हजार मरीजों को उच्च अस्पतालों में रेफर किया गया और 10 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया गया। बीते दो वर्षों में 1,000 डॉक्टरों की भर्ती की गई है, जिससे मातृ मृत्यु दर 142 से घटकर 122 हो गई है।

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