रांची में खाद्य सुरक्षा जांच पर संकट: 56 नए अफसर तैनात, पर राज्य में लैब सिर्फ एक

रांची में खाद्य सुरक्षा जांच के लिए नियुक्त 56 नए अफसर और झारखंड की एकमात्र सरकारी खाद्य प्रयोगशाला

रांची सहित पूरे झारखंड में 56 नए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति के बाद जहां जांच तेज होने की उम्मीद है, वहीं राज्य की एकमात्र बदहाल सरकारी खाद्य प्रयोगशाला के कारण इस पूरी व्यवस्था पर संकट मंडरा रहा है, जहां मैनपावर और जरूरी केमिकल्स की भारी कमी है।

झारखंड में खाद्य सुरक्षा जांच पर संकट, 56 नए अफसरों की हुई नियुक्ति

झारखंड में खाद्य सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल ही में राज्य को 56 नए खाद्य सुरक्षा अधिकारी सौंपे हैं। विभाग का दावा है कि इन नए अधिकारियों की नियुक्ति से खाद्य पदार्थों की जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी और नियमों का पालन बेहतर ढंग से कराया जा सकेगा। हालांकि, इस प्रशासनिक सुधार के सामने धरातल पर एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

अकेले रांची जिले में तैनात रहेंगे 7 पदाधिकारी

रोजाना अलग-अलग खाद्य इकाइयों से लिए जाएंगे सैंपल

इस नई व्यवस्था के तहत अकेले रांची जिले में अब कुल 7 खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी काम करेंगे। नए अधिकारियों में इस कार्य को लेकर काफी उत्साह है और उनका कहना है कि अब हर रोज शहर के विभिन्न इलाकों, होटलों, मिठाई की दुकानों और अन्य खाद्य इकाइयों से सैंपल एकत्र कर जांच के लिए भेजे जाएंगे, ताकि मिलावटखोरी पर लगाम कसी जा सके। राज्य में अब कुल मिलाकर 80 खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी मैदान में काम करेंगे।

पूरे राज्य में सिर्फ एक प्रयोगशाला, मैनपावर और केमिकल की भारी कमी

एक महीने में जांचे जा पाते हैं केवल 350 सैंपल

अफसरों की संख्या बढ़ने के बावजूद सबसे बड़ी अड़चन जांच प्रयोगशाला को लेकर आ रही है, क्योंकि पूरे झारखंड में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए सिर्फ एक ही सरकारी प्रयोगशाला संचालित है। इस एकमात्र लैब की स्थिति अत्यंत खराब है, जहां महज 15 लोगों की टीम पूरे राज्य से आने वाले सैंपलों का बोझ संभाल रही है। प्रयोगशाला में न तो पर्याप्त केमिकल्स उपलब्ध हैं और न ही सभी उपकरण ठीक से काम कर रहे हैं। इसके अलावा, यहां का नया माइक्रोबायोलॉजी लैब अक्टूबर से बंद पड़ा है, जो अब तक शुरू नहीं हो सका है।

प्रयोगशाला के प्रभारी के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में महीने भर में सिर्फ 350 सैंपल ही जांचे जा पाते हैं। लैब को सुचारू रूप से चलाने के लिए विभाग से 30 अतिरिक्त कर्मियों और जरूरी केमिकल्स की मांग की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, एक मिर्च या खोआ जैसे सिंगल सैंपल की जांच करने में ही 3 से 5 दिन का समय लग जाता है। ऐसे में जब सभी 80 खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी रोजाना फील्ड से सैंपल भेजेंगे, तो इस एकमात्र लैब पर बोझ अत्यधिक बढ़ जाएगा, जिससे सैंपल जांच के समय का आकलन कर पाना मुश्किल हो रहा है।

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