रांची के खेलगांव स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होटवार जेल) में एक महिला कैदी के कथित यौन शोषण और उसके गर्भवती होने के आरोपों को लेकर राज्य की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज है। जहाँ एक तरफ विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार और जेल प्रशासन पर हमलावर है, वहीं दूसरी तरफ सामने आई मेडिकल रिपोर्ट और जेल प्रशासन के बयानों ने इस पूरे घटनाक्रम को एक नया मोड़ दे दिया है।
इस बेहद संवेदनशील मामले की तह तक जाने के लिए ‘भारत मंथन’ के मुख्य संपादक विवेक रंजन सिंह ने होटवार जेल के अधीक्षक (Superintendent) से वन-टू-वन विशेष बातचीत की, जिसमें जेल अधीक्षक ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों पर विस्तार से अपना पक्ष रखा।
भारत मंथन के साथ बातचीत में जेल अधीक्षक का पक्ष
‘भारत मंथन’ से बात करते हुए जेल अधीक्षक ने विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया और उन्हें पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने इस मामले में निम्नलिखित मुख्य बिंदु सामने रखे:
- शिकायत का अभाव: जेल अधीक्षक ने विवेक रंजन सिंह को बताया कि इस कथित मामले को लेकर न तो संबंधित महिला कैदी की ओर से कोई मौखिक या लिखित शिकायत मिली है और न ही उसके परिजनों ने कोई शिकायत दर्ज कराई है।
- साक्ष्यों की कमी: उन्होंने दावा किया कि जेल परिसर के सीसीटीवी फुटेज में ऐसी किसी भी गतिविधि का कोई प्रमाण नहीं है और न ही इस बात का कोई चश्मदीद गवाह है।
- सुरक्षा प्रोटोकॉल: अधीक्षक के अनुसार, जेल के भीतर मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था और कड़े नियमों के चलते इस तरह की किसी भी घटना का होना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
इस पूरे विवाद पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए जेल अधीक्षक ने कहा, “मैंने हमेशा पूरी कर्मठता, ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपनी ड्यूटी निभाई है, और जेल की सुरक्षा व गरिमा को बनाए रखने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। बिना किसी ठोस आधार के मेरे चरित्र और कर्तव्य पर इस तरह की बेबुनियाद व मनगढ़ंत टिप्पणियां किए जाने से मुझे काफी ठेस पहुंची है। लेकिन मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है कि अंततः सत्य की ही जीत होगी। अपनी बेदाग छवि को धूमिल करने के इस प्रयास के खिलाफ और अफवाह फैलाने तथा झूठे आरोप लगाने वालों पर जल्द ही मानहानि (Defamation) का मुकदमा दर्ज कराऊंगा।”
सदर अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में क्या आया सामने?

‘भारत मंथन’ से बातचीत के दौरान जेल अधीक्षक ने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि महिला कैदी की मेडिकल रिपोर्ट पूरी तरह से नेगेटिव आई है।
जानकारी के अनुसार, पिछले दिनों 23 वर्षीय एक महिला कैदी ने पेट में तेज दर्द की शिकायत की थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जेल प्रशासन द्वारा उसे तुरंत जांच और इलाज के लिए रांची के सदर अस्पताल भेजा गया था। वहाँ डॉक्टरों की देखरेख में महिला का अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट और अन्य आवश्यक चिकित्सकीय जांचें की गईं।
सदर अस्पताल द्वारा जारी आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, महिला कैदी गर्भवती नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि महिला को पेट में दर्द किसी अन्य सामान्य शारीरिक समस्या के कारण हुआ था, जिसका गर्भावस्था से कोई संबंध नहीं है।
आरोपों और दावों के बीच फंसा मामला
गौरतलब है कि इससे पहले नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक कड़ा पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि जेल अधीक्षक द्वारा महिला कैदी का शारीरिक शोषण किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कारा महानिरीक्षक (IG) पर भी साक्ष्य मिटाने और गवाहों के रातों-रात स्थानांतरण करने की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
अब जहाँ एक तरफ मेडिकल रिपोर्ट और जेल प्रशासन के बयान इन आरोपों को पूरी तरह एक अफवाह बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल अभी भी जेल के भीतर की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल, मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट होती दिख रही है, लेकिन राजनीतिक स्तर पर बहस अभी भी जारी है।
