सदर अस्पताल रांची में पिछले एक वर्ष के दौरान दो या उससे अधिक बार रक्तदान अथवा एसडीपी दान करने वाले 41 नियमित स्वैच्छिक रक्तदाताओं को एक विशेष फेलिसिटेशन कार्यक्रम में प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर सिविल सर्जन समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रांची सदर अस्पताल में स्वैच्छिक रक्तदाताओं के लिए सम्मान समारोह आयोजित
रांची: सदर अस्पताल रांची के परिसर में पिछले एक वर्ष की अवधि के दौरान दो या दो से अधिक बार स्वैच्छिक रक्तदान करने वाले और एसडीपी (Single Donor Platelet) डोनेट करने वाले दाताओं के लिए एक विशेष ‘फेलिसिटेशन कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। इस सम्मान समारोह के दौरान समाज में स्वास्थ्य सेवा के प्रति उत्कृष्ट और सराहनीय योगदान देने वाले कुल 41 नियमित स्वैच्छिक रक्तदाताओं को विभाग की ओर से प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस गौरवपूर्ण अवसर पर रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विमलेश कुमार, डीआरसीएचओ (DRCHO) डॉ. असीम मांझी, ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. रंजू सिन्हा और राज्य रक्त संक्रमण परिषद की सहायक निदेशक जूली नीता सोके मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। इनके अलावा कई अन्य वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मियों ने भी कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दर्ज कराई। Bharat Manthan Live News इस सकारात्मक सामाजिक पहल की विस्तृत रिपोर्ट आप तक पहुंचा रहा है।
रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा: सिविल सर्जन
समारोह को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने सभी सम्मानित रक्तदाताओं की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है, क्योंकि किसी भी व्यक्ति द्वारा दान किया गया एक यूनिट रक्त कई जरूरतमंद और गंभीर मरीजों को नया जीवन देने में पूरी तरह सक्षम होता है। उन्होंने आम नागरिकों को चिकित्सा मानकों के प्रति जागरूक करते हुए एक महत्वपूर्ण अपील भी की। सिविल सर्जन के अनुसार, कोई भी पूर्ण रूप से स्वस्थ पुरुष हर 3 महीने की अवधि में सुरक्षित तरीके से रक्तदान कर सकता है, जबकि एक स्वस्थ महिला हर 4 महीने के अंतराल पर नियमित रूप से रक्तदान कर सकती हैं।
जानें कौन और कब कर सकता है सुरक्षित रक्तदान
अस्पताल की ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. रंजू सिन्हा ने कार्यक्रम के दौरान सुरक्षित रक्तदान से जुड़ी आवश्यक चिकित्सा योग्यताओं की महत्वपूर्ण जानकारी मंच से साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि 18 से 65 वर्ष के आयु वर्ग के बीच का कोई भी स्वस्थ नागरिक स्वेच्छा से रक्तदान करने के लिए योग्य है। रक्तदान करने वाले व्यक्ति का न्यूनतम वजन कम से कम 45 किलोग्राम होना अनिवार्य है। कोई भी इच्छुक नागरिक अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल अथवा सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त ब्लड बैंक में जाकर पूरी तरह सुरक्षित माहौल में रक्तदान की इस प्रक्रिया को पूरा कर सकता है।
राज्य रक्त संक्रमण परिषद की सहायक निदेशक जूली नीता सोके ने भी उपस्थित रक्तदाताओं को भविष्य में इस परोपकारी कार्य को निरंतर जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने रेखांकित किया कि आपके द्वारा दिया गया एक यूनिट रक्त किसी भी सड़क दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति, प्रसव काल से गुजर रही गर्भवती महिला, थैलेसीमिया के मरीजों अथवा कैंसर पीड़ितों के लिए ऐन वक्त पर जीवनदान साबित होता है। इसके साथ ही उपाधीक्षक डॉ. विमलेश कुमार ने भी जिले की जनता से अपील की कि आपातकालीन चिकित्सा परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए हर स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर आगे आकर स्वैच्छिक रक्तदान अवश्य करना चाहिए।
