झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव को लेकर महागठबंधन के भीतर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस के खाते की सीट होने के बावजूद प्रत्याशी के चयन और उसके नाम पर अंतिम मुहर लगाने का निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सहमति और पसंद के आधार पर लिया जाएगा।
महागठबंधन में राज्यसभा सीट को लेकर मंथन तेज
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राज्य की राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। सत्ताधारी महागठबंधन के प्रमुख घटक दलों—कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)—के बीच उम्मीदवार के चयन को लेकर लगातार गहन मंथन का दौर चल रहा है। भारत मंथन लाइव न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार, आगामी चुनाव में कांग्रेस अपने खाते की सीट पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। हालांकि, गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने के लिए प्रत्याशी के चयन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पसंद और सहमति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व इस बार झारखंड से एक ऐसे चेहरे को मैदान में उतारने की रणनीति बना रहा है, जो महागठबंधन के सभी सहयोगी दलों को पूरी तरह स्वीकार्य हो। इसके साथ ही, उस उम्मीदवार की झामुमो विधायकों के बीच भी मजबूत पकड़ और पैठ होनी अनिवार्य मानी जा रही है। इस विशेष रणनीति के पीछे सबसे मुख्य वजह चुनाव के दौरान होने वाली संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंका को माना जा रहा है। कांग्रेस के रणनीतिकारों को यह डर सता रहा है कि यदि प्रत्याशी झामुमो नेतृत्व की पसंद का नहीं हुआ, तो मतदान के वक्त अप्रत्याशित राजनीतिक परिस्थितियां खड़ी हो सकती हैं।
क्रॉस वोटिंग की आशंका से सतर्क हुआ सत्ता पक्ष
राजनीतिक विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि झारखंड की वर्तमान सियासत में झामुमो इस समय महागठबंधन का सबसे बड़ा और प्रभावी घटक दल है। इस लिहाज से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भूमिका गठबंधन के भीतर पूरी तरह से निर्णायक बनी हुई है। यही कारण है कि कांग्रेस पार्टी कोई भी ऐसा राजनीतिक जोखिम या कदम उठाने से बच रही है, जिससे सहयोगी दलों के बीच किसी भी प्रकार की असहजता या आपसी मतभेद की स्थिति उत्पन्न हो। इस समन्वय को स्थापित करने के लिए दिल्ली से लेकर रांची तक लगातार उच्च स्तरीय बैठकों का दौर जारी है।
वर्तमान विधानसभा समीकरणों के अनुसार, महागठबंधन के पास राज्यसभा सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है। इसके बावजूद, कांग्रेस नेतृत्व पूरी तरह से आश्वस्त दिखाई नहीं दे रहा है। हालिया वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में संपन्न हुए राज्यसभा चुनावों के दौरान क्रॉस वोटिंग और ऐन वक्त पर राजनीतिक समीकरणों में आए अचानक बदलावों के कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। इसी कड़वे अनुभव को देखते हुए सत्ता पक्ष बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।
विपक्ष के दावों के बीच अंतिम निर्णय की तैयारी
झारखंड में मुख्य विपक्षी दल भी लगातार सत्ता पक्ष के भीतर अंदरूनी मतभेद और अंतर्विरोध होने का दावा करता रहा है। विपक्ष के इन सियासी दावों के बीच कांग्रेस किसी भी स्तर पर रणनीतिक चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अंतिम मुहर के बाद ही प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा की जाएगी, जिससे गठबंधन के सभी विधायकों का एकजुट वोट सुनिश्चित किया जा सके।
